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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 587 of 737

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Page 587

( २०१ )
^१क्रांतिज्ञः सममंडल शंकु^२कराँ^३ वयोश्नलंबज्ञः^४ ।
^५जानाति कोणशंकु^६च्छाया घटिकाः स तंत्रज्ञः ॥ ७ ॥
शंकुतलप्राच्यपरांतरद्वयं विक्षयो^१ विजानाति ।
विषुवच्छायामेकं दृष्ट्वाऽऽदित्यं^२ च^३ गणकः सः ॥ ८ ॥
पातलशंकुमुदये^१न्दुस्ते वा दृग्ज्यां खे^३ विजानाति ।
^२दृक् पाताल दृक्शंकोः पृथक् तले वा स तंत्रज्ञः^४ ॥ ६ ॥

७. (घ) १. कांतिज्ञः for (क्रांतिज्ञः) २. शंकुं (च) (ङ) for (शंकु)
३. करां: (च) for (कराँ)
४. वयोक्षलंबज्ञः (ग) च योक्षलंबज्ञः for (वयोश्नलंबज्ञः)
५. जानाति जानाति for (जानाति) ६. शंकुं for (शंकु)
(ग)(वि०— इसकी श्लोक संख्या ८ है)
(च) ४ वयोक्षलंबज्ञः for (वयोश्नलंबज्ञः)
(ङ) ३. कराँ च for (कराँ व) ४. योश्नलंबज्ञः for (योश्नलम्बज्ञः)
६. शंकुच्छाया for (शंकुच्छाया)
८. (घ) वीक्ष (ग) वीक्ष्य for (विक्षयो)
२. दृष्ट्वादित्यं (ग) (च) for (दृष्ट्वाऽऽदित्यं)
(ग) (वि०—इसकी श्लोकसंख्या ६ है)
(च) १. वीक्ष for (विक्ष) ३. व for (च)
(ङ) १. वीक्ष्य for (विक्ष) ४. विषुवच्छाया for (विषुवच्छाया)
२. दृष्ट्वाऽऽदित्यं for (दृष्ट्वादित्यं)
६. (घ) १. मुदयेऽस्ते (ग) मुदयेस्ते for (मुदयेँदुस्ते)
२. हग्पावालगशंक्वोः (ग) हग्पातालमशंकुकोः for (दृक्पाताल दृक्शंकोः)
(ग) ३. विजानाति for (विजानाति)
४. तन्त्रज्ञः for (तंत्रज्ञः) ५. पाताल for (पातल)
(वि०— इसकी भी श्लोकसंख्या ६ है)
(च) ५. पाताल for (पातल) २. हग्पाताल for (दृक्पाताल)
६. दृग्शंकोः for (दृक्शंकोः)
(ङ) ५. पाताल for (पातल) २. हक्पाताल for (दृक्पाताल)
१. मुदयेऽस्तो for (मुदयेन्दुस्ते) ३. खेर्विजानाति for (खे विजानाति)
६. गशङ्कोः for (दृक्शंकोः)