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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 558 of 737

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Page 558

( १७२ )
त्रिगुणः शनिरिन्दु¹नोन्येभगणलब्धैर्ग्र²हादिभिः सहितः ।
भौमो³ऽर्को गुरुर्दु⁵च्चं वान्य⁴भगणाः के ॥ ६ ॥
द्वित्रिगुणयो रविर्द्वोर्युति¹ कुजोन्यान्यभगणलब्धेन ।
राश्यादिना²धिकगुरुरूना शशि³रन्यभगणाः के ॥ ७ ॥
द्रष्टो¹द्यधिकान³श्विन्यौ दयिका⁴त्वाकरो तिथौ² मध्यात् ।
मध्यार्कं⁵ गुणकं⁶ गुणमिष्टं मध्यं स तंत्रज्ञः ॥ ८ ॥
पातो¹नतुल्योगमतीन् प्रतिलोममतीन् ।
ग्रहान् दिवसं² वारं विपरीतैः शन्याद्यैर्यो वेत्ति³ स कालतंत्रज्ञः ॥ ६ ॥
६. (घ) १. रिन्दुनोऽन्य (ग) रिन्दूनोन्य for (रिन्दुनोन्य)
२. गृंहादिभिः (ग) for (ग्रंहादिभिः)
३. भौमो हीनोर्को (ग) भौमो हीनोर्को for (भौमोऽर्को)
४. वान्यभगणाः for (वान्यभगणाः)
(ग) ५. रिदूच्चं for (रिदुच्चं)
(च) ३. भौमोर्को for (भौमो