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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 541 of 737

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Page 541

( १५५ )
सहश²च्छेदंशयुतिच्छेद³विभक्तफलं प्रथमजातौ ।
अंशै¹रेशागुणिता छेदै छेदा⁴ द्वितीयाभ्याम् ॥८॥ प्रथमद्वितीयजाति समाप्तः⁵
ऊर्ध्वांशा³ छेदगुणास्तृतीयजातौ द्वयोः पृथक् परयोः ।
छेदै⁴ छेदा गुणिताः स्वांशयु⁵तोनैरूपरिमांशाः¹ ॥ ६ ॥
तृतीय चतुर्थीजाति सं०² ।
त्रैराशिके प्रमाणफलमिच्छाद्यं² तयोः सहशराशिः¹ ।
इच्छाफलेन गुणिता प्रमाणभक्ता²फलम्भवति ॥ १० ॥ त्रैराशिकं सं०³
व्यस्तत्रैराशिकफला¹मिच्छाभक्तः प्रमाणफलघातः । व्यस्तत्रैराशिकं सं०³
त्रैराशिकादिषु फलं विषमेष्वेकादशांतेषु² ॥ ११ ॥

८. (घ) १. रंशा (ग) for (रेशा)
(ग) २. सदृिश for (सहश) ३. युतिश्छेद for (युतिच्छेद)
४. छेदैश्छेदा for (छेदैछेदा)
५. “प्रथम……समाप्तः” शब्द अंकित नहीं है ।
(च) १. अंशैरंशा for (अंशैरेशा)
६. (घ) १. रुपरिमांशाः (च) for (रूपरिमांशाः) २. समाप्तेः for (स०)
(ग) ३. ऊर्ध्वांशाश्छेद for (ऊर्ध्वांशाच्छेद) ४. छेदैश्छेदा for (छेदैछेदा)
५. युरेता for (युतो)
वि० “तृतीय…से जाति स०” तक अंकित नहीं है ।
(च) २. जाती समाप्ते for (जाति स०)
१०. (घ) १. राशी (ग) (च) for (राशिः) २. प्रमाणक्ता for (प्रमाणभक्ता)
३. समाप्तम् for (स०)
(ग) “त्रैराशिकं समाप्तं” शब्द अंकित नहीं है ।
(च) समाप्तं for (स०)
११. (घ) १. फलमिच्छा (ग) for (फलामिच्छाभक्तः)
२. दशयंतेषु for (दशांतेषु) ३. समाप्तम् for (स०)
(ग) ३. ‘व्यस्त’ से ‘स०’ तक यहां अंकित नहीं है ।
(च) २. दृश्यंतेषु for (दशांतेषु)