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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 508 of 737

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Page 508

( १२२ )
प्रागूनाधिकभुक्तिः पश्चादधिकोल्पभुक्तिरस्तमितः ।
यास्यत्यथवास्तमयं यतस्ततो दृश्यघटिकोक्तिः ॥ ३१ ॥
घटिकाद्वयेन चन्द्रो दृश्योर्कात् सितगुरुज्ञशनिभौमाः ।
अध्यर्द्धा या घटिकाया त्रिभागघटिको ज्ञ (त्त) राधिकाय ॥ ३२ ॥
ग्रहसूर्यान्तरघटिका स्वभुक्ति लिप्तानि स्वनयुतयोश्च ।
प्राग्वदनंतर हृताहीनाधिकनाडिका दिवसाः ॥ ३३ ॥

चंशुबृबुशमं
२३ ०१२१२
००००५०००३०५०

३१. (घ) १. प्रागूनोधिकभुक्तिः for (प्रागूनाधिकभुक्तिः)
(क) २. संमितः for (स्तमितः)
३२. (घ) १. घटिकया (ग) (च) for (घटिकाया)
३. घटिकोत्तराधिकया (ग) (च) for (घटिकोत्तराधिकाय)
(ग) ४. अध्यर्द्धयं for (अध्यर्द्धया)
(च) ५. दृश्योर्कात् for (दृश्योर्कात्)
(क) १. शित for (सित) २. घटिकया for (घटिकाया) ३. शशिकोत्तरा for (घटिकोत्तरा)

७

| चं | शु० | बृ० | बु० | श० | मं |
| :---: | :---: | :---: | :---: | :---: | :---: |
| ३ | १ | १ | २ | २ | २ |
| | ३ | ५० | १० | ३० | ५० |

३३. (घ) ४. घटिकाः (ग) (च) for (घटिका)
५. रूनयुतयोश्च (च) for (स्वनयुतयोश्च)
२. प्राग्वत्तदंतर (च) for (प्राग्वदनंतर)
३. हृता (ग) कृता for (हृता)
७

| चं | शु० | बृ० | बु० | श० | मं० |
| :---: | :---: | :---: | :---: | :---: | :---: |
| ३ | १ | १ | २ | २ | २ |
| | ३ | ५० | १० | ३० | ५० |

६. दिवसा (च) for (दिवसाः)
(ग) ८. युततयोश्च for (युतयोश्च)
(च) ३. हृता for (हता)
(क) १. लिप्ताभिरून for (लिप्तानिस्वन.)
(ग) २. तदंतर for (दनंतर)
३. हृवा for (हृता)