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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 465 of 737

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Page 465

( ७६ )
लम्बनघटिकालग्नात् तात्कालिकात्त्रिराश्यूनात् ।
ऋणं (ऋणं) अधिके ऽर्के हीने धनमसकृत्पंच दृश्यन्ते ॥ ५ ॥
करणं गुणाद् व्यासाद्धर्द्धिसुवेद ४८ विभाजिता फलविभक्त ।
लम्बननाड्यो भास्करवित्रिभलग्नान्तरं वा ॥ ६ ॥
रविशशिपातगतिकला लम्बनघटिका गुणेष्वष्टा ।
यदि लम्बनमृणमूना धनमधिकाः स्वफललिप्ताभिः ॥ ७ ॥
अक्षज्याया वित्रिभलग्नात्स्वक्रान्तिरुत्तरार्कस्य ।
इन्दोर्वा यद्यधिका न नतिः सौम्या ऽन्यथा याम्या ॥ ८ ॥

५. (घ) १. लब्धं लंबन (ग) लब्धं लंबन् (च) for (लम्बन)
२. ऋणमधिके (ग) ऋणमधिकेऽर्के हीने (क) ऋणमधिकेऽर्के हीने for (ऋणं
अधिकेऽर्के हीने )
३. ससकृत्पंच (क) मसकृत्यं च for (मसकृत्पंच)
४. दृश्यंते (क) दृश्यन्ते (च) दृश्यंते for (दृश्यन्ते)
(क) १. लब्धं लंबन for (लम्बन)
(च) ५. राशनात् for (राश्यूनात्) १ ऋणमधिकेकें for ऋणं अधिकेऽर्के)
६. (घ) १. विभाजितात्पलविभक्ता (ग) विभाजितात्फलविभक्ता (क) (च) for
(विभाजिता फलविभक्त)
२. लंबतन्याडचो for (लम्बननाड्यो)
३. वित्रिवजग्नांतर (ग) वित्रिलग्नांतर (क) बित्रिभलग्नांतर for वित्रिभल-
ग्नांतरं)
४. धावा (ग) ज्यावा (क) ज्यावा for (वा)
(च) ४. लग्नांतरंवावा for (लग्नांतरं वां)
७. (घ) १. गुणाङ्कृता-गुणा हृता (ग) (क) गुणाकृता षष्ट्या for (गुणेष्वष्टा)
(ग) २. शशिपातागति for (शशिपातगति)
३. स्वफललिप्तानिः for (स्वफललिप्ताभिः)
(च) १. गुणा हृताषष्ट्या for (गुणेष्वष्टा)
८. (घ) १. अक्षय्याया (ग) अक्षछाया for (अक्षज्याया)
२. अवनतिः (ग) (क) स्वनतिः for (ननतिः)
(क) ४. स्वाक्रान्ति for (स्वक्रान्ति)
(च) ३. वनतिः for (ननतिः)
५. अवग्रहचिह्न लुप्त