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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 463 of 737

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Page 463

( ७७ )
आद्यन्त्ययोः सधूम्रः कृष्णः खण्डग्रहेऽर्द्धतोऽभ्यधिके ग्रासः ।
सकृष्ण (ष्ण) ताम्रः सर्वग्रहणे शशिकपिलवर्णः ॥ १६ ॥
मानविमर्दस्थितीदलवलनेष्ट ग्रास समकलाद्येषु ।
चन्द्रग्रहणाध्याय विंशतिरार्या श्चतुर्थोयां ॥ २० ॥
इति ब्रह्मगुप्ते चतुर्थोऽध्यायः

१६. (घ) १. आद्यन्तयोः (ग) (क) for (आद्यन्त्ययोः)
२. षण्डग्रहे (ग) for (खण्डग्रहे)
३. ऽर्केतोभ्यधिके for (ऽर्द्धतोभ्यधिके)
४. ग्रासः (दूसरी पंक्ति का आरम्भ) (ग) (क)
५. शशी (ग) (क) (च) for (शशि)
६. कपिलाँ (ग) कपिलवर्णाः (क) कपिलः for (कपिलवर्णः)
७. वर्णाः (यह शब्द नहीं है) (क) 'वर्णा' पद लुप्त
(ग) ८. सुधूम्र for (सधूम्रः)
(च) ३. द्वैतोभ्यधिके for (र्द्धतोम्यधिके) ६. कपिल for (कपील)
२०. (घ) १. दवलनेष्ट for (दलवलनेष्ट)
२. चन्द्रग्रहणाध्यायो (ग) (क) for (चन्द्रग्रहणाध्याय)
३. चतुर्थीयम् । (ग) (क) for (चतुर्थोयां)
५. 'इति' से 'अध्यायः' तक अंकित नहीं । केवल अध्याय समाप्ति सूचक “छः”
अंकित है ;
(च) २. चंद्रग्रहणाध्याया for (चन्द्रग्रहणाध्याय) ३. चतुर्थोयं for (चतुर्थोयां)
५. 'इति' से 'अध्यायः' तक लुप्त हैं। अध्याय समाप्ति सूचक कोई और चिह्न
भी विद्यमान नहीं ।