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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 441 of 737

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Page 441

( ५५ )

स्वचरासुभिस्सूनयुता १६१७ क्रमोत् क्रमस्थैः क्रमोक्रमन्यस्ताः ।
उदयप्राणा व्यस्ताश्चार्कं तात्कालिकं कृत्वा ॥ १७ ॥
रविणा भुक्त्याराशेः कला गुणाः स्वोदयासुभिर्भक्ताः ।
राशिकलाभिर्लब्धा प्रश्नासुभ्योऽशवः शोध्याः ॥ १८ ॥


१७. (घ) १. रूनयुताः (ग) रूनयुताः (क) (ख) नूनयुता for (सूनयुता)
२. + १७६५, १६३५, १६३५, १३६५, १६००+
३. क्रमोक्रमन्यस्ताः (ग) (क) क्रमोत्क्रमास्ते (ख) क्रमोक्रमभ्यस्ताः for
(क्रमोक्रमन्यस्ताः)
(ग) २. यहाँ कोई संख्या नहीं दी गई ।
(ख) ४. स्ववरासुभिः for (स्वचरासुभि)
५. क्रमाक्रमो for (क्रमोत्क्रमस्थै)
६. : विसर्ग लुप्त हैं
७. रचार्क for (श्चार्कं)
८. 'कृत्वा' पद लुप्त है ।
(च