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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 438 of 737

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Page 438

( ५२ )
शंकु छाया$^७$ कृत्योस्त्रिज्या कृतितत्समास$^५$ गुणहृतया$^१$ ।
मूलं$^२$ लम्बाक्ष्यज्येस्तदंशकास्तद्धनुर्भागाः$^३\ ^६\ ^४$ ॥ ६ ॥
विषुवत्कर्णाहते$^६$ वा शंकु छायागते$^३$ पृथक् ।
त्रिज्ये$^५$ त्रिज्येतर जीवा$^१$ लंबाक्षांसो क्रमज्योना$^२$ ॥ १० ॥

६. (घ) १. हृतयो (ग) हृतयोः (ख) हतयोः for (हृतया)
२. मूले (क) (ख) for (मूलं)
३. लंबाक्ष्यज्येतदंश (क) लबाक्ष्यस्थे for (लंबाक्ष्यज्येस्तदंश)
४. तर्द्धनुर्भागाः (क) सद्धक्रभागाः (ख) तद्धनुमागः for (तद्धनुर्भागाः)
(क) ५. नृत्यमासनस्य सूत्रयोः for (तत्समासगुणहृतया)
६. तदसंकाश (ख) तदशकास्व for (तदंशका)
इसकी श्लोक संख्या ८ है
(ख) ७. क्वाया for (छाया)
(च) ३. लम्बाक्ष्यजे for (लम्बाक्षजे) ६. तदंशका for (रतदंशका)
१०. (घ) १. जीवा वालंबाक्षांशो (क) (ख) जीवावलंबाक्षाशो for (जीवालंवाक्षांसो)
२. त्क्रमज्योना (क) कामावना (ख) कमज्योना for (क्रमज्योना)
३. छायाहृते (ग) (क) छायाहते (ख) हृते for (छायागते)
(ग) ४. लंबाक्षांशो for (लंबाक्षांसो)
(क) ५. त्रियेतर (ख) तिज्ये for (त्रिज्येतर) इसकी श्लोक संख्या ११ दी है।
परन्तु यह भूल प्रतीत होती है क्योंकि इसकी टीका के अन्त में १० लिखा
है।
(ख) ६. विषुत्वार्याहिते for (विषुवत्कर्णाहते)
(च) ३. छायाद्गते for (छायागते)
२. लंबाक्षांशोत्क्रमज्योना ।