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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 418 of 737

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Page 418

( ३२ )
प्राक् पश्चाद्वा याभिर्घटिकाभिर्दिनदलान्नतः^४ सूर्यः^३ ।
तिथ्यंते तद्रहिते^१ त्रिंशत्^२ घटिकावशेषाभिः^५ ॥ २५ ॥
विपरीतमर्धरात्राच्चन्द्रग्रहणे^२ शशी रविग्रहणे ।
सूर्योतस्ततस्ताभिरेव^१^३ घटिकाभिरिन्दुरपि ॥ २६ ॥
दिनदल^१ परिधि स्फुट तिथिनतकेन्द्रज्यावधो^२ गुणोर्केन्दोः^३ ।
इंदू^४ धृति धृतिभि १६१ नवनववेदै^८ ४६६ व्यासार्द्धकृतिर्भक्तः^५ ॥ २७ ॥
१०६६२६००^६
२५. (घ) १. तद्रहिव for (ग) (तद्रहिते) (ग) तद्रहितस्त्रिंशद् for (तद्रहिते त्रिंशत्)(क)
तद्रहितं for (तद्रहिते)
२. त्र्यंशद् (क) त्रिदशत for (त्रिंशत्)
(ग) ३. नतसूर्यः for (नतः सूर्यः)
(ख) ४. घटिकामि for (घटिकाभि)
५. त्रिंशदधिकावशेषाभिः for (त्रिंशत्घटिकावशेषाभिः)
(च) ३. दिनदलान्नत् सूर्यः for (दिनदलान्ततः सूर्यः)
२. त्रिशद् for (त्रिंशत्)
२६. (घ) १. यतस्वषः for (यतस्ततस्)
२. चन्द्रग्रहणे (क) चन्द्रग्रहादिनिग्रहाणः for (चन्द्रग्रहणे)
३. रेवमथ for (रेव)
(च) २. चन्द्रग्रहणो for (चन्द्रग्रहणे)
२७. (घ) १. दज for (दल)
२. व्या for (ज्या) (क) ज्यावाधो for (ज्यावधो)
३. केंन्दोः (ग) (ख) केंन्द्रो for (केंन्दोः)
४. इंद्धृतिधृतिभि (ग) (क) इंदुविधृतिभि for (इंदूधृतिधृतिभि)
५. भक्तः for (र्भक्तः) (ग) (ख) कृतिर्भक्ति for (कृतिर्भक्तः)
६. १०६६ ।। २६०० for (१०६६२६००)
(ग) ७. व्यासाद्धंकृति (क) व्यासाद्धंकृते for (व्यासार्द्धकृति)
वि० रेखाङ्कित दोनों संख्याएं "वेद" के पश्चात् एक स्थान पर हैं ।
(१६१, ४६६)
(क) ३. गुणोर्केस्तः for (गुणोर्केन्दोः)
८. नंवनववेदै (च) for (नवनववेदै)
वि० संख्याएं मूल में लुप्त हैं ।
(च) ३. केंद्रोः for (केंन्दोः) ५. भक्तः for (र्भक्तः)