ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
by आचार्य ब्रह्मगुप्त
DevanagariHindipublished737 pages
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( १८ )
कलिगतशुद्धिः प्राग्वच्छुक्राब्दोब्धाधिपोक्षभगण वध्यतक्षितिजस्य ।
खत्रिचाष्ट रससप्त वसुरवाग्निवेद्युतात् ॥ ५१ ॥
४३०८७६८००००
बुधशीघ्रस्य खरवांबर रसनन्द दृष्टोष्ट वसुयमो दधिभिः ।
४२८८८६६००
खचतुष्टयमशरगुण शशिवेदैः ४३१३५२००००
सुरेन्द्रगुरोः ॥ ५२ ॥
५१. (घ) १. ब्दा for (क्ष) (ग) ब्द भगणवधात् for (क्षभगणवध्यत) (ख) ब्द for (क्ष)
२. वध्यत् for (वध्यत) (पहली पंक्ति का अन्तिम शब्द) (ख) वधात् for
(वध्यत)
३. 'क्षितिजस्य' दूसरी पंक्ति का आरम्भिक पद । (ग) (ख)
४. खत्र (ग) खत्रयाष्ट (ख) खत्रयाष्ट for (खत्रिचाष्ट)
(ग) ५. रसप्त for (रससप्त)
(क) (क-यहां का मूलपत्र उपलब्ध नहीं है।)
(ख) ६. शुधि for (शुद्धिः)
७. हृधियो for (ब्दाधिपो)
(च) ७. ळुक्राब्दोब्दाधियो for (ळुक्राब्दोब्धाधिपो)
२. वध्यत् for (वध्यत)
४. खत्रचाष्ट for (खत्रिचाष्ट)
८. दैद्युतात् for (वेद्युतात्)
५२. (घ) १. रसनं दृष्टो (च) for (रसनन्द दृष्टो)
२. यह संख्या यहाँ श्लोक के अन्त में दी है। (ग) (च)
(ग) ३. नन्दाष्टाष्ट (क) (ख) नन्दाष्टा for (नन्ददृष्टोष्ट)
४. ४२८८८६६००० for (४२८८८६६००)
(क) ४. मूल में संख्या लुप्त है । टीका में ४२८८८६६००० अंकित है ।
२. मूल में संख्या लुप्त है, टीका में ४३१३५२००० अंकित है ।