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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 391 of 737

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Page 391

( ५ )
³ ⁴
पंचांबराणि गुणरामंपंच सप्तस्वरेषवः शशिनः ।
१
५७७५३३०००००
५
भौमस्य द्वियमशराष्टपक्षवसुसरत्नवद्वियमाः ॥ १६ ॥
२
२२६६२८२५२२
१ ४
६३६६६८६८४
३ २
कृतवसुनवःष्टनवनव षडूनवागेन्द्वो ज्ञशीघ्रस्य ।
५
१७६३६६६८६८४
३
जीवस्य शरेष्वद्वि षड्यक्षि द्विकृतसप्तरामाः ॥ १७ ॥
६
३६४२२६४५५
६
सितशीघ्रस्य यमलंगो वेदनवाष्टाग्नि पक्षयमखनगाः ।
४
७०२२३८६४६२
२ ३
अष्टनवपक्षमुनिरसशररसमनवोऽर्कपुत्रस्य ॥ १८ ॥
५
१४६५५६७२६८

१६. (क) १. संख्या लुप्त है । टीका में अंकित है ।
२. संख्या लुप्त है । टीका में अंकित है ।
(ख) ३. पंच वाराणि for (पंचांबराणि)
४. गुणरामं for (गुणराम)
(च) ५. वृद्धि for (वद्वि)
१७. (घ) १. १७६३६६६८६४ for (१७६३६६६८६८४) (च)
२. वांगे (ग) षड्ित्रनव (क) षट्त्रिन (ख) षट्त्रिंनवा for (षडूनवागेन्द्वो)
३. पद्यक्ष (ग) षट्द्वयक्षि (क) पट्पक्ष (ख) पट्ट्यक्ष for (षड्यक्षि)
(ग) ४. + २२६६८२८५२२ (क) ‘ग’ में अंकित संख्या १६वें श्लोक की टीका के
अन्त में है ।
(क) ५. संख्या मूल में नहीं, टीका में अंकित है ।
६. संख्या मूल में नहीं, टीका में अंकित है ।
(ख) ७. वसू for (वसु)
(च) २. षड्नवागेदवो for (षडूनवागेवो) ३ पद्यक्ष for (पड्यक्षि)
१८. (घ) १. लागो for (लगो) (च) यमलागो for (यमलंगो)
२. यक्ष for (पक्ष)
३. ऽक्र्कं (ग) ऽर्क्क for (ऽर्क)
(क) ४. मूल में संख्या लुप्त है। टीका में अंकित है।
५, मूल में संख्या लुप्त है। टीका में अंकित है।
(च) ६. चाष्टाग्नि for (वाष्टाग्नि)