बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
by नरपति नाल्ह
DevanagariHindipublished315 pages
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जैनों के "विविधतीर्थ कल्प" के अनुसार वाराणसी चार भागों में विभाजित
है । १—देव वाराणसी, जहाँ श्री विश्वनाथ का मन्दिर स्थापित है । २—
राजधानी वाराणसी—जहाँ यवनों का वास है । ३—मदन वाराणसी और
४—विजय वाराणसी । जैनियों के मतानुसार पार्श्वनाथ का जन्म काशी में
ही हुआ था ।
चीनदेश के यात्रियों द्वारा वाराणसी पो-लो निस्सी समझा जाता है ।
उन लोगों के अनुसार इसका क्षेत्रफल ४००० ली माना गया है और इस
नगर की बस्ती घनी मानी गई है । उनके मतानुसार इसके मन्दिरों में ३०
संघाराम और १०० देवालय हैं ।
वेदों और पुराणों में अनेक स्थानों पर वाराणसी या काशी का उल्लेख
मिलता है । महाभारत के "अनुशासन पर्व" के अनुसार इस नगर के स्थापित
करने वाले देवदास किसी युद्ध में हराए जाने के बाद जंगल में भाग गये थे
तथा "उद्योग पर्व" के अनुसार भीमसेन के पुत्र इन्हीं देवदास को प्रवर्त्तन
नामक एक पुत्र भी था । देवदास की जीवनी के सम्बन्ध में "हरिवंश" में भी
बहुत कुछ हमें मिलता है ।
यद्यपि हिन्दू और जैन धर्म ग्रन्थों में अनेक स्थलों पर काशी का उल्लेख
है या अनेक कथाएँ भी मिलती हैं फिर भी इस नगरी की राजनैतिक अवस्था
का स्पष्ट वर्णन हमें बौद्ध ग्रन्थों से प्राप्त होता है । बौद्ध काल में काशी ने
अपना राजनीतिक महत्व खो दिया था क्योंकि कोशल के राजा प्रसेनजित के
समय में काशी कोशल में मिला ली गयी थी । प्रसेनजित के पिता महाकोशल ने
अपनी पुत्री कोशलदेवी के राजा बिम्बसार के साथ पाणिग्रहण के अवसर पर
काशी नगरी को दहेज स्वरूप दिया था । इसके पश्चात् उत्तरी भारत के
शक्तिशाली राजा अजातशत्रु द्वारा यह नगर पूर्ण रूप से जीत लिया गया था
और मगध राज्य में मिला लिया गया था ।
'गउड'
१६ वीं शताब्दी के अन्त तक 'गौड' बंग प्रदेश की राजधानी हिन्दू और
मुसलमान राजाओं के शासन-काल में रह चुका है । जैनियों के आचारागसूत्र
के अनुसार गौड देश रेशमी कपडों (दुकूल) के लिए प्रसिद्ध था । कुछ लोगों के
मतानुसार "गौड़" नाम "गुड़" से निकला है, क्योंकि किसी जमाने में यह
देश "गुड़" के व्यापार का केन्द्र समझा जाता था । आज भी मालदा
शहर से १० मील की दूरी पर गौड के भग्नावशेष अपने पुरातनपने का