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बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

by नरपति नाल्ह

DevanagariHindipublished315 pages

Page 266 of 315

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Page 266
  • १६० -
    रुदार नखरा महीपा¹।
    हाल रही भय बोलह² बोथ॥
    बीसल देव परं चापीपा³।
    पाजा हो चापीपा⁴ जाणीय बोथ⁵॥
    आनंद⁶ पयाण दखदा।
    जंगमं भाट करह⁷ सद्दं संप्राज॥
    पात्र गंभार नृपस वरदत्र⁹।
    सपि जयड परि¹⁰ चापीयउ बीसल चहुवान¹¹॥२३३॥
    दीटकठ¹² टन्नट¹³ धुता कठ पाठ।
    ठम्मकी टम्मकी¹⁴ मेलइण्डइ पाउ¹⁵॥
    १. आ० १२ महीपा।
    २. आ० १२ बोलीपा।
    ३. आ० ६ क्राईक, आ० १२ आपीपो।
    ४. आ० १२ पवै।
    ५. आ० ६ पाश्रिया टोल ।
    ६. आ० १२ आयंद।
    ७. आ० १२ तिहा करह।
    ८. आ० १२ (में नहीं है)।
    ९. आ० १२ गूभर नस्यो।
    १०. आ० १२ श्रो परि।
    ११. आ० १२ राय चौहाण।
    यह छंद आ० ६ में २३५ तथा आ० १२ में २८६ है।
    १२. अ० २ चौया को, आ० १२ फोट कोड।
    १३. अ० २ हँहँगो।
    १४. आ० १२ ठभिक ठभिक।
    १५. अ० २ देखइ पाव, आ० ६ मेलदइ पाउ, आ० १२ धण मेलई पाठ।