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बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

by नरपति नाल्ह

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DevanagariHindipublished315 pages

Page 176 of 315

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Page 176
  • ७० -
    थामहूँ¹ गगन शखीगा।
    तब² नृपीय डकाईयउ³ संभर याज⁴ ॥
    चालउ⁵ ढतगालउ उठाकीय⁶ चाल।
    चाडउ थिरहूँ⁷ तिहा पाछउ नाग ॥
    वासिग देव दया परिद्ध।
    दुध पपाखियी धारा पाग ॥
    दूध कटोरह पायस्यौ।
    भगति करेथ्याँ धारी दुइकर जोदि ॥
    सोनावता फी पावडी।
    उछग जावा म्हाकउ नाह न होइ ॥
    तडतड⁸ मुखि दैगोरडा⁹ बोलइ¹⁰ वासिगनाथ¹¹।
    सडण न मानहूँ¹² गोरी¹³ थारड¹⁴ नाथ¹⁵ ॥
    १. आ० ६ शवीरे, आ० १२ यामै।
    २. आ० १२ तठे।
    ३. आ० ६ धुंदायि, आ० १२ डकाईयो।
    ४. आ० १२ मरि राउ।
    छंद अ० २ खंड २ में ८१, आ० ६ खंड २ में ७४, आ० ६ में
    ६८ तथा आ० १२ में ८६ है।
    ५ आ० ६ चाल्यो। ६ आ० ६ कुताखी।
    ७. आ० ६ आयो।
    यह छंद आ० ६ में ६६।
    ८. आ० १२ (में नहीं है)। ९. आ० १२ गोरी।
    १०. आ० १२ बोली। ११. आ० १२ राउ।
    १२. आ० १२ माने।
    १३. आ० ६ भोली, आ० १२ (में नहीं है)।
    १४. आ० ६ थारो, आ० १२ थारौ।
    १५. आ० १२ नाह।