Skip to content
SarvaKosh
भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

by कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल)

Source: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (origin)

Public domain in India · Report a copyright issue

DevanagariHindipublished1,416 pages

Page 569 of 1416

Read in context
Page 569

चिकित्सा ] भाषाटीकासहिता । ५३७


हिक्का--श्वासयोगकी चिकित्सा ।

हिक्काश्वासातुरे पूर्व तैलाक्ते स्वेद इष्यते ।
स्निग्धैर्लवणयोगैश्च मृदुवातानुलोमनम् ॥
ऊर्ध्वाधः शोधनं शक्ते दुर्बले शमनं मतम् ॥ १ ॥

हिक्का ( हुचकी ) और श्वास रोगम प्रथम रोगीके वक्षःस्थलपर सैंधानमक मिलाकर सरसोंके तैलकी मालिश करे, फिर स्निग्ध द्रव्योंके द्वारा स्वेद देवे । पश्चात् यदि रोगी बलवान् हो तो वायुको अनुलोमन करनेवाली, मृदु वमनकारक और मृदु विरेचन ओषधिके द्वारा ऊपर और नीचेसे शरीरको शुद्ध कर और रोगी निर्बल हो तो दोषोंको शमन करनेवाली औषधि देवे ॥ १ ॥

कोलमज्जाऽञ्जनं लाजास्तिक्ता काञ्चनगैरिकम् ।
कृष्णा धात्री सिता शुण्ठी कासीसं दधिनाम च ॥ २ ॥
पाटल्याः सफलं पुष्पं कृष्णा खर्जूरमस्तकम् ।
षडेते पादिका लेहा हिक्काघ्ना मधुसंयुताः ॥ ३ ॥

१ बेरकी गुठलीकी मींग, कालासुरमा और खीले, २-कुटकी, कचनार और गेरू, ३-पीपल, आमले, मिश्री और सोंठ, ४-कसीस और कैथ ५-पाढलके फल और फूल ६-पीपल और खजूरका मस्तक इन छः प्रयोगोंमेंसे किसी एक प्रयोगका उत्तम प्रकारसे बारीक चूर्ण करके शहदमें मिलाकर सेवन करनेसे हिक्का रोग दूर होता है ॥ २-३ ॥

मधुकं मधुसंयुक्तं पिप्पली शर्करान्विता ।
नागरं गुडसंयुक्तं हिक्काघ्नं नावनत्रयम् ॥ ४ ॥

मुलहठीको शहदमें मिलाकर अथवा पीपलको मिश्रीके साथ मिलाकर वा सोंठके चूर्णको गुड़में मिलाकर नस्य देनेसे हिक्कारोग दूर होता है ॥ ४ ॥

स्तन्येन मक्षिकाविष्ठा नस्यं वाऽलक्तकाम्बुना ।
योज्यं हिक्काभिभूताय स्तन्यं वा चन्दनान्वितम् ॥ ५ ॥

मक्खीकी विष्ठाको स्त्रीके दूधक साथ अथवा आलको जलके साथ पीसकर लाल चन्दनको स्त्रीके दूधमें घिसकर हिक्कारोगीको नस्य देनेसे हिचकियोंका आना दूर होता है ॥ ५ ॥