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भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

by कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल)

Source: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (origin)

Public domain in India · Report a copyright issue

DevanagariHindipublished1,416 pages

Page 283 of 1416

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Page 283

चिकित्सा ] भाषाटीकासहिता । २५१


अफीम और खजूर ( छुहारा ) इन दोनोंको बराबर भाग लेकर एकत्र खरल करके एकएक रत्तीकी गोलियाँ बनालेवे ! इन गोलियोंको सेवन करनेसे अत्यन्त वृद्धिको प्राप्त हुआ अतीसार और रक्तस्राव दूर होता है ॥ १५ ॥

जातीफलादिवटी ।

जातीफलं च खर्जूरमहिफेनं तथैव च ।
समभागानि सर्वाणि नागवल्लीरसेन च ॥ १६ ॥
वल्लमात्रा वटी कार्या देया तक्रानुपानतः ।
अतीसारं जयेद् घोरं वैश्वानर इवाहुतिम् ॥ १७ ॥

जायफल, खजूर ( छुहारा ) और अफीम इनको समानभाग लेकर पानके रसमें खरल करके दो दो रत्तीकी गोलियाँ बनालेवे । एक एक गोली मठेके साथ देनेसे भयंकर अतिसार इस प्रकार नष्ट होजाता है, जिस प्रकार अग्नि आहुतिको तत्काल भस्म कर देती है ॥ १६ ॥ १७ ॥

पूर्णचन्द्रोदयरस ।

शुद्धं च तालकं लौहं गगनं च पलं पलम् ।
कर्पूरं पारदं गन्धं प्रत्येकं वटकोन्मितम् ॥ १८ ॥
जातीकोषं मुरापत्रं शठी तालीशकेशरम् ।
व्योषं चोचं कणामूलं लवङ्गं पिचुसम्मितम् ॥ १९ ॥

शुद्धहरिताल, लोहा और अभ्रक ये प्रत्येक चार चार तोले, कपूर, पारा और शुद्धगन्धक ये प्रत्येक एकएक तोला एवं जावित्री, कपूरकचरी, तेजपात, कचूर, तालीसपत्र, केशर, सोंठ, पीपल, मिरच, दारचीनी, पीपलामूल और लौंग ये प्रत्येक दो-दो तोले लेवे । सबको एकत्र खरल करके एक शीशीमें भरकर रख देवे॥१८॥१९॥

भक्षयेत् प्रातरुत्थाय गुरुदेवद्विजार्चकः ।
नानारूपमतीसारं ग्रहणीं सर्वरूपिणीम् ॥ १२० ॥
अम्लपित्तं तथा शूलं शूलं च परिणामजम् ।
रसायनवरश्चायं वाजीकरण उत्तमः ॥ १२१ ॥

इस चूर्णको प्रतिदिन प्रातःकाल गुरु और इष्टदेवका पूजन कर दो दो रत्तीकी मात्रासे सेवन करे तो यह अनेक प्रकारके अतिसार, सब प्रकारकी संग्रहणी, अम्लपित्त, शूल और परिणामशूलको नष्ट करता है । यह चूर्ण अतिश्रेष्ठ रसायन और उत्तम वाजीकरण औषधि है ॥ १२० ॥ १२१ ॥