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बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

Baudhayana Dharmasutra Hindi

by महर्षि बौधायन

Source: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (origin)

DevanagariHindipublished486 pages

Page 193 of 486

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Page 193

विंशः खण्डः ] प्रथमप्रश्ने एकादशोऽध्यायः १४१

**अनु०—**यदि वर प्रथम लाजाहवन करके कन्यावाले को गोमिथुन ( एक गाय और एक साँड ) प्रदान कर कन्या को ग्रहण करता है तो वह आर्ष विवाह होता है ॥ ४ ॥

वैवाहिकोनां लाजाहुतीनां प्रथमाहुत्यनन्तरं कन्यास्वामिने गोमिथुनं वरं प्रदाय तस्या एव पुनर्ग्रहणमार्षो नाम विवाहः ॥ ४ ॥

चतुर्थः पुनः—

दक्षिणासु नीयमानास्वन्तर्वेदि ऋत्विजे स दैवः ॥ ५ ॥

**अनु०—**यदि यज्ञ में दक्षिणाओं के दिये जाते समय वेदि के समीप ही ऋत्विज् को कन्या प्रदान की जाय तो वह दैव विवाह है ॥ ५ ॥

**टि०—**जैसा कि गोविन्द स्वामी ने स्पष्ट किया है कन्या दक्षिणा के एक भाग के रूप में ऋत्विज् को मिलती है, ऋत्विष् 'प्रजापतिस्त्रियां यशः' इत्यादि छः मन्त्रों से कन्या को ग्रहण करता है और शुभ नक्षत्र में विवाह के होम करता है ।

ऋत्विग्वरणवेलायामेव कश्चिद्वरसम्पद्विर्युक्तमृतृत्विकत्वेन वृत्वा दक्षिणाकाले तदीयभागेन सह कन्यां तस्मै दद्यात् । स च तां प्रतिगृह्य समाप्ते यज्ञे 'प्रजापतिस्त्रियां यशः' इति षड्भिर्मन्त्रैः पुनः प्रतिगृह्य शुभे नक्षत्रे विवाहहोमं कुर्यात् । स दैवो नाम ॥ ५ ॥

सकामेन सकामायां मिथस्संयोगो गान्धर्वः ॥ ६ ॥

**अनु०—**प्रेम करनेवाला पुरुष का यदि प्रेम करनेवाली कन्या से संयोग हो तो वह गान्धर्व विवाह कहलाता है ॥ ६ ॥

संयोगस्समवायः । विवाहहोमस्तु यथाविध्येव । एवंलक्षणको गान्धर्वो नाम पञ्चमः ॥ ६ ॥

षष्ठस्तु—

धनेनोपतोप्याऽऽसुरः ॥ ७ ॥

**अनु०—**कन्यावाले को धन से सन्तुष्ट करके विवाह करना आसुर विवाह कहलाता है ॥ ७ ॥

कन्यावन्तमुपतोष्य । यथाविध्येव होमः ॥ ७ ॥

सप्तम उत्तरः—

प्रसह्य हरणाद्राक्षसः ॥ ८ ॥

**अनु०—**बलपूर्वक कन्या का अपहरण कर विवाह करना राक्षस विवाह है ॥ ८ ॥