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बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

Baudhayana Dharmasutra Hindi

by महर्षि बौधायन

Source: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (origin)

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DevanagariHindipublished486 pages

Page 17 of 486

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Page 17

है :—धर्म और उसके उपादान, चारों वर्णों के आचार कर्त्तव्य एवं जीवनवृत्तियाँ, ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास आश्रमों के आचार, उपजातियाँ एवं वर्णसङ्कर, सपिण्ड और सगोत्र, पाप, उनके प्रायश्चित्त एवं व्रत, आशौच और उससे शुद्धि, ऋण, ब्याज, साक्षी और न्यायव्यवहार, अपराध और उनके दण्ड, राजा और राजा के कर्त्तव्य, स्त्री के कर्त्तव्य, पुत्र और दत्तक पुत्र, उत्तराधिकार, स्त्रीधन और सम्पत्ति का विभाजन।

धर्मसूत्र और स्मृति

धर्मसूत्र स्मृति नाम से प्रचलित रचनाओं से भिन्न तथा अधिक प्राचीन माने गये हैं। वेद के ईश्वर प्रकाशित एवम् ऋषिदृष्ट वाङ्मय को श्रुति और धर्मशास्त्र को स्मृति कहा गया है—

श्रुतिस्तु वेदो विज्ञेयो धर्मशास्त्रं तु वै स्मृतिः ।—मनु० २।१०

श्रुति और स्मृति का भेद वस्तुतः महत्त्वपूर्ण है। इस महत्त्व को स्वीकारते हुए प्रो० मैक्स म्यूल्लेर ने लिखा है—

“The distinction between Sruti (revelation) and Smṛti (tradition) which is a point of such vital importance for the whole Brahmanic system will also be found significant in an historical point of view.” —p. 77.

श्रुति से भिन्न स्मृति के अन्तर्गत सूत्रात्मक एवं श्लोकबद्व दोनों प्रकार की धर्मशास्त्रीय रचनाएँ आती हैं। किन्तु संकुचित अर्थ में 'स्मृति' शब्द का प्रयोग 'मनुस्मृति' 'याज्ञवल्क्यस्मृति' जैसी पद्यात्मक धर्मशास्त्रीय रचनाओं के लिए हुआ है। इन स्मृतियों में कई सूत्ररचनाओं के ऊपर ही आधारित है।

स्मृति की प्रामाणिकता उसके श्रुति पर आदृत होने के कारण ही है—

पूर्वविज्ञानविषयं विज्ञानं स्मृतिरुच्यते ।
पूर्वज्ञानाद्विना तस्याः प्रामाण्यं नावधार्यते ॥

स्मृतियों में सबसे प्राचीन 'मनुस्मृति' है। इसका समय ईसा से कई शताब्दी पहले का है। अन्य स्मृतियाँ ४०० और १०० ई० के बीच की हैं। स्मृतियाँ अधिकांशतः पद्य में हैं और भाषा की दृष्टि से धर्मसूत्रों के बाद की रचनाएँ हैं। विषयवस्तु की दृष्टि से स्मृतियाँ धर्मसूत्रों से अधिक व्यवस्थित और सुगठित हैं।

मुख्य स्मृतिकार १८ हैं—मनु, बृहस्पति, दक्ष गौतम, यम, अङ्गिरा, योगीश्वर, प्रचेता, शातातप, पराशर, संवर्त, उशनस्, शंख, लिखित, अत्रि, विष्णु, आपस्तम्ब, हारीत।

इसके अतिरिक्त उपस्मृतियों के भी लेखकों के नाम इस प्रकार गिनाये गये हैं—

नारदः पुलहो गार्ग्यः पुलस्त्यः, शौनकः क्रतुः।
बौधायनो जातुकर्ण्यो विश्वामित्रः पितामहः ॥
जाबालिर्नाचिकेतश्च स्कन्दो लौगाक्षिकश्यपौ ।
व्यासः सनत्कुमारश्च शान्तनुर्जनकस्तथा ॥

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