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बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

Baudhayana Dharmasutra Hindi

by महर्षि बौधायन

Source: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (origin)

DevanagariHindipublished486 pages

Page 144 of 486

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Page 144

९२ बौधायन-धर्मसूत्रम् [ व्रणप्रायश्चित्तम्

ब्राह्मणस्य व्रणद्वारे पूयशोणितसम्भवे ।
क्रिमिरुत्पद्यते तत्र प्रायश्चित्तं कथं भवेत् ॥३५॥
गोमूत्रं गोमयं क्षीरं दधि सर्पिः कुशोदकम् ।
त्र्यहं स्नात्वा च पीत्वा च क्रिमिदष्टः शुचिर्भवेत् ॥३६॥

यदि ब्राह्मण के मवाद और रक्त से भरे चोट या फोड़े पर क्रिमि उत्पन्न हो जाय तो उसका प्रायश्चित्त किस प्रकार से किया जायगा ? क्रिमि उत्पन्न होने पर गाय का मूत्र, गाय का गोबर, दूध, दधि, घृत, कुश के साथ ( उबाले गये ) जल तीन दिन स्नान कर पीने पर शुद्ध होता है ।

टि०— सूत्र में 'क्रिमिदष्टः' है । गोविन्द स्वामी के अनुसार यह नियम केवल क्रिमि के काटने पर ही नहीं, अपितु अपने शरीर में उत्पन्न क्रिमि के काटने पर है । अथवा यह प्रायश्चित्त फोड़े या चोट पर क्रिमि उत्पन्न होने की स्थिति में विहित है ।

नैतत्क्रिमिदंशनमात्रे चोद्यते । क्व तर्हि ? स्वशरीरोत्पन्नक्रिमिदंशे । इत-
-रथा प्रश्नोत्तरानुपपत्तेः । यद्वा—व्रणद्वारे क्रिमीणामुत्पत्तिमात्रे एतत्प्रायश्चित्तम्,
न दंशने ॥ ३५-३६ ॥

शुनोपहतस्सचेलोऽवगाहेत ३७ ॥

**अनु०—**कुत्ते के छू देने पर वस्त्रों को पहने हुए स्नान करे ॥ ३७ ॥
शुनोपहतः शुना स्पृष्टः नाभेरूर्ध्वमिति शेषः ॥ ३७ ॥

अथ वाऽऽह—
प्रक्षाल्य वा तं देशमग्निना संस्पृश्य पुनः प्रक्षाल्य पादौ चाऽऽ-
चम्य प्रयतो भवति ॥ ३८ ॥

अथवा जिस अंग का कुत्ते ने स्पर्श किया हो उसे धोकर फिर उसे अग्नि से स्पर्श कराये, पैरों को धोकर आचमन करने पर शुद्ध होता है ॥ ३८ ॥

**टि०—**गोविन्द स्वामी ने उपर्युक्त वस्त्र सहित स्नान का नियम उस अवस्था के लिए बताया है जब कुत्ते ने नाभि से ऊपर स्पर्श किया हो । गौतम ने भी कुत्ते के स्पर्श पर वस्त्र सहित स्नान का प्रायश्चित्त बताया है, २. ५. ३०, पृ० १५३ ।
किन्तु अन्य आचार्यों का मत भी उद्धृत किया है जिनके अनुसार जिस अंग को छुए हों उसे धोने से ही शुद्धि हो जाती है यदुपहन्यादित्येके २. ५. ३१.
संभवतः गोविन्द स्वामी ने नाभि से ऊपर स्पर्श पर वस्त्रसहित स्नान का नियम जातूकर्ण्य की इस व्यवस्था के आधार पर निर्दिष्ट किया हो—