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आयुर्वेद दर्शन

आयुर्वेद दर्शन

Ayurveda Darshan

by वैद्य महादेव चन्द्रशेखर पाठक

Source: 1949 Edition · De Ra Ekatara Indoor · 1949 (origin)

DevanagariHindipublished235 pages

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पावित्र हृदय से प्रगट किये गये हैं दूसरे वे इसके पहिले प्रगट किये गये हैं अतः उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हमारा कर्तव्य है । सिवाय उनके प्रति भी हम कृतज्ञ हैं जिन्होंने समय २ पर अपनी बहुमूल्य सम्पत्ति और सहायता प्रदान की । प्रेस के कर्मचारियों ने जिस सहृदयित्व से काम किया उसके लिये वे हार्दिक श्रुत्यवाद के पात्र हैं । भाषा विषयक बुटियों को तज्ञ इसलिये क्षमा करेंगे कि एक महाराष्ट्रीय के द्वारा की गई हिन्दी वाग्देवता की यह प्रेममयी पूजा है ।

श्रिमती चैत्र श्रु. १ सोमवार
वि० सं. १९९४
१२ अप्रैल १९३७.

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महादेव चन्द्रशेखर पाठक.