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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 995 of 1063

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हे इंद्र! गोदान के अवसर पर अन्न की कामना करने वाले पतिपत्नी तुम्हारा ध्यान करते
हुए तुम्हें फल देने के लिए आकर्षित करते हैं. तुम स्वर्ग को गमन करने वाले दोनों पति और
पत्नी को जानते हो. उस समय तुम अपने वर्षणशील और सहायक वज्र को प्रकट करते हो.
(१)
विदुष्टे अस्य वीर्यस्य पूरवः पुरो यदिन्द्र शारदीरवातिरः सासहानो
अवातिरः.
शासस्तमिन्द्र मर्त्यमयज्युं शवसस्पते.
महीममुष्णाः पृथिवीमिमा अपो मन्दसान इमा अपः.. (२)
इंद्र शरद ऋतु की वस्तुओं में प्रकट हो कर शत्रुओं को बारबार व्यथित करते हैं. इंद्र के
बल को मनुष्य जानते हैं. हे इंद्र! जो मृत्युलोक वासी तुम्हारा पूजन नहीं करते, उन पर तुम
शासन करो तथा इन जलों और पृथ्वी की वृद्धि करो. (२)
आदित् ते अस्य वीर्यस्य चकिरनन्मदेषु वृषन्नुशिजो यदाविथ सखीयतो
यदाविथ.
चकर्थ कारमेभ्यः पृतनासु प्रवन्तवे.
ते अन्यामन्यां नद्यं सनिषणत श्रवस्यन्तः सनिषणत... (३)
हे धन समर्थ जलो! हम तुम्हारे वीर्य का वर्णन करते हैं. इंद्र के उन्मत्त होने पर तुम ही
उन की रक्षा करते हो. तुम सेनाओं में सेवा योग्य कर्म के करने वाले हो. तुम नदियों के
आश्रय में रहो तथा अन्न प्रदान करते हुए सब के स्नान के साधन बनो. (३)
सूक्त-७६ देवता—इंद्र
वने न वा यो न्यधायि चाकंछुचिर्वां स्तोमो भुरणावजीगः.
यस्येदिन्द्रः पुरुदिनेषु होता नृणां नर्यो नृतमः क्षपावान्.. (१)
हे अश्विनीकुमारो! तुम देवताओं का भरणपोषण करने वाले हो. यह निर्दोष तथा इंद्र की
कामना करने वाला स्तोत्र हैं. इंद्र इस की कामना बहुत दिनों से करते हैं. वे इंद्र मनुष्यों के श्रेष्ठ
सोमरस को प्राप्त करने वाले हैं. यह स्तोत्र अर्थात् मंत्र समूह उन्हीं की ओर अग्रसर होता है.
(१)
प्र ते अस्या उषसः प्रापरस्या नृतौ स्याम नृतमस्य नृणाम्.
अनु त्रिशोकः शतमवह्नन्नृन् कुत्सेन रथो यो असत् ससवान्.. (२)
हम वीरों में श्रेष्ठ इंद्र के विश्वास पात्र सेवक रहें तथा दूसरी उषा को भी पार करें.
त्रिलोक ऋषि ने हमें सैकड़ों उषाएं प्राप्त कराईं. कुत्स ऋषि ने संसार रूपी रथ को अन्न से
युक्त किया. (२)
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