Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 980 of 1063

Read in context
Page 980

जो इंद्र अपनी महिमा से आकाश, पृथ्वी, जल, पर्वतों, वज्र, बल तथा स्वर्ग को धारण
करते हैं, तुम उन्हीं इंद्र का पूजन करो. (९)
स राजसि पुरुष्टुतँ एको वृत्राणि जिघ्नसे. इन्द्र जैत्रा श्रवस्या च यन्तवे..
(१०)
हे इंद्र! तुम विजय प्राप्त करने वाले यश के लिए तेजस्वी हुए हो. तुम अकेले ही अपने
शत्रुओं को नष्ट कर देते हो. (१०)
सूक्त-६३ देवता—इंद्र
इमा नु कं भुवना सीषधामेन्द्रश्च विश्वे च देवा:.
यज्ञं च नस्तन्वं च प्रजां चादित्यैरिन्द्रः सह चीक्लृपाति.. (१)
यह इंद्र, विश्वे देव और भुवन सुख पाने का प्रयत्न करते हैं. वे इंद्र आदित्यों सहित आ
कर हमारे यज्ञ, शरीर और संतान को शक्ति प्रदान करें. (१)
आदित्यैरिन्द्रः सगणो मरुद्भिरस्माकं भूत्वविता तनूनाम्.
हत्वाय देवा असुरान् यदायन् देवा देवत्वमभिरक्षमाणा:.. (२)
जिन देवताओं ने स्वर्ग की रक्षा के लिए राक्षसों का विनाश किया था, वे इंद्र आदित्य
और मरुत् हमारे शरीर की रक्षा के लिए हमारे यज्ञ में पधारें. (२)
प्रत्यञ्चमर्कमनयंछचीभिरादित् स्वधामिषिरां पर्यपश्यन्.
अया वाजं देवहितं सनेम मदेम शतहिमाः सुवीरा:.. (३)
जिन इंद्र ने अपनी शक्ति से सूर्य को प्रत्यक्ष किया तथा पृथ्वी को अन्न वाली बनाया,
उन्हीं इंद्र से हम देवताओं का हितकारी अन्न प्राप्त करें तथा वीरों से युक्त रहते हुए सौ वर्षों
की आयु प्राप्त करें. (३)
य एक इद् विदयते वसु मर्ताय दाशुषे. ईशानो अप्रतिष्कुत इन्द्रो अङ्ग..
(४)
इंद्र हवि देने वाले यजमान को अन्न देते हैं. इस कार्य में कोई भी इंद्र की सहायता नहीं
कर सकता. (४)
कदा मर्तमराधसं पदा क्षुम्पमिव स्फुरत्. कदा नः शुश्रवद् गिर इन्द्रो अङ्ग..
(५)
वे इंद्र यज्ञ न करने वालों पर अपने चरण का प्रहार कर के उन्हें कब ताड़ना देंगे तथा
ebook converter DEMO Watermarks*