अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextसूक्त-३८ देवता—इंद्र
आ याहि सुषुमा हि त इन्द्र सोमं पिबा इमम्. इदं बर्हिः सदो मम.. (१)
हे इंद्र! हम ने सोमरस तैयार कर लिया है. तुम यहां हमारे यज्ञ में आओ तथा इन बिछी
हुई कुशाओं पर बैठ कर सोमरस को पियो. (१)
आ त्वा ब्रह्मयुजा हरी वहतामिन्द्र केशिना. उप ब्रह्माणि नः शृणु.. (२)
हे इंद्र! तुम्हारे घोड़े हमारे मंत्रोच्चारण के साथ ही तुम्हारे रथ में जुड़ जाते हैं. वे तुम्हें
तुम्हारे मन चाहे स्थान पर ले जाते हैं. तुम्हारे वे घोड़े तुम्हें हमारे यज्ञ में लाएं, जिस से तुम
हमारे आह्वान को सुन सको. (२)
ब्रह्माणस्तवा वयं युजा सोमपामिन्द्र सोमिनः. सुतावन्तो हवामहे.. (३)
हे इंद्र! हमारे पास तैयार किया हुआ सोमरस है. हम तुम्हारे सेवक हैं और सोमयाग कर
चुके हैं. तुम सोमरस पीते हो, इसलिए हम तुम्हारा आह्वान कर रहे हैं. (३)
इन्द्रमिद् गाथिनो बृहदिन्द्रमर्केभिरर्किणः. इन्द्रं वाणीरनूषत.. (४)
पूजा संबंधी मंत्रों से इंद्र का पूजन किया जाता है. सामवेद के मंत्रों के गान में भी इंद्र
की ही स्तुति है. हमारी वाणी भी इंद्र की ही स्तुति करती है. (४)
इन्द्र इद्धर्योः सचा संमिश्ल आ वचोयुजा. इन्द्रो वज्री हिरण्ययः.. (५)
वज्र धारण करने वाले इंद्र उपासकों का हित चाहते हैं. इंद्र के घोड़े उन के साथ रहते हैं.
हमारे मंत्रोच्चारण के साथ ही वे घोड़े रथ में जोड़े जाते हैं. (५)
इन्द्रो दीर्घाय चक्षस आ सूर्यं रोहयद् दिवि. वि गोभिरद्रिमैरयत्.. (६)
इंद्र ने दीर्घ काल तक प्रकाश देने के लिए सूर्य को आकाश में स्थापित किया. सूर्य रूपी
इंद्र ने ही अपनी किरणों से मेघों का भेदन किया है. (६)
सूक्त-३९ देवता—गोसूक्ति
इन्द्रं वो विश्वतस्परि हवामहे जनेभ्यः. अस्माकमस्तु केवलः.. (१)
हम विश्व के सभी प्राणियों की ओर से इंद्र का आह्वान करते हैं. वे इंद्र हमारे ही हों. (१)
व्य १ न्तरिक्षमतिरन्मदे सोमस्य रोचना. इन्द्रो यदभिनद् वलम्.. (२)
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