Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 941 of 1063

Read in context
Page 941

हे इंद्र! तुम अपने शरीर में बल प्राप्त करने के लिए सोमरस पी कर प्रसन्न बनो. मुझे
अधिक धन देने के लिए तुम हर्षित होओ. मैं तुम्हारा स्तोता हूं. मुझे दूसरे का निंदक मत
बनाओ. (६)
वयमिन्द्र त्वायवो हविष्मन्तो जरामहे. उत त्वमस्मयुर्वसो.. (७)
हे इंद्र! हम सोम रूप हवि से युक्त हो कर तुम्हारी कामना करते हैं. हे सब को वास देने
वाले इंद्र! तुम हमें मनचाहा फल देने के लिए प्रसन्न बनो. (७)
मारे अस्मद् वि मुमुचो हरिप्रियार्वाङ् याहि. इन्द्र स्वधावो मत्स्वेह.. (८)
हे इंद्र! तुम अश्वों को प्रेम करने वाले हो. अपने अश्वों को तुम हम से दूर रथ से अलग
मत करो. तुम अश्व युक्त रथ पर चढ़े हुए ही हमारे यज्ञ में आओ. यहां आ कर तुम सोमरस
पियो और हर्ष पूर्ण बनो. (८)
अर्वाञ्चं त्वा सुखे रथे वहतामिन्द्र केशिना. घृतस्नू बर्हिरासदे.. (९)
हे इंद्र! श्रम की बूंदों के कारण भीगे हुए घोड़े तुम्हें सुख देने वाले रथ पर बैठा कर बिछी
हुई कुशाओं पर विराजमान करने के लिए हमारे सामने लाएं. (९)
सूक्त—२४ देवता—इंद्र
उप नः सुतमा गहि सोममिन्द्र गवाशिरम्. हरिभ्यां यस्ते अस्मयुः.. (१)
हे इंद्र! हमारा सोम गाय के दूध से युक्त है. तुम उसे पीने के लिए हमारे पास आओ.
तुम्हारे जिन रथों में घोड़ों को जोड़ दिया गया है, वे रथ हमारे यज्ञ में आना चाहते हैं. (१)
तमिन्द्र मदमा गहि बर्हिष्ठां ग्रावभिः सुतम्. कुविन्व् स्य तृष्णवः.. (२)
हे इंद्र! यह सोम कुशाओं पर रखा है. तुम इस की ओर आओ तथा इसे पी कर तृप्त
बनो. (२)
इन्द्रमित्था गिरो ममाच्छागुरिषिता इतः. आवृते सोमपीतये.. (३)
हमारी स्तुति रूपी वाणियां इंद्र को हमारे यज्ञ में लाने के लिए उन के पास जाती हैं. (३)
इन्द्रं सोमस्य पीतये स्तोमैरिह हवामहे. उक्थेभिः कुविदागमत्.. (४)
हम अपनी स्तुतियों के द्वारा इंद्र को सोम पान के लिए बुलाते हैं. इंद्र हमारे यज्ञ में
अनेक बार आएं. (४)
ebook converter DEMO Watermarks*