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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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Page 847

सुख प्राप्त हो तथा मुझे सभी से अभय मिले. (१३)
पृथिवी शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिर्द्यौः शान्तिरापः शान्तिरोषधयः
शान्तिर्वनस्पतयः
शान्तिर्विश्वे मे देवाः शान्तिः सर्वे मे देवाः शान्तिः शान्तिः शान्तिः
शान्तिभिः.
ताभिः शान्तिभिः सर्व शान्तिभिः शमयामो ऽ हं यदिह घोरं यदिह क्रूरं
यदिह
पापं तच्छान्तं तच्छिवं सर्वमेव शमस्तु नः.. (१४)
पृथ्वी, अंतरिक्ष, द्युलोक, जल, ओषधियां, वनस्पतियां तथा सभी देव हमारी अपेक्षा
अधिक शक्ति प्राप्त करें. सभी प्रकार की इस शांति प्रक्रिया में यहां जो भयानक और निर्दय
फल है, उसे हम दूर करते हैं. ये सभी शांत बन कर हमें कल्याण प्रदान करें. (१४)
सूक्त-१० देवता—मंत्र में बताए हुए
शं न इन्द्राग्नी भवतामवोभिः शं न इन्द्रावरुणा रातहव्या.
शमिन्द्रासोमा सुविताय शं योः शं न इन्द्रापूषणा वाजसातौ.. (१)
हे इंद्र और अग्नि! तुम अपनी रक्षा बुद्धि के द्वारा हमारे सकल दुःखों को दूर करने वाले
बनो. यजमानों के द्वारा हवि दिए गए इंद्र और वरुण हमारे दुःखों को दूर करें. इंद्र और सोम
हमें सुख देने के लिए हमारा दुःख निवारण करें. इंद्र और पूषा देव भयंकर युद्ध में हमारे
दुःखों, भयों एवं रोगों का शमन करें. (१)
शं नो भगः शमु नः शंसो अस्तु शं नः पुरंधिः शमु सन्तु रायः.
शं नः सत्यस्य सुयमस्य शंसः शं नो अर्यमा पुरुजातो अस्तु.. (२)
भग और नराशंस देवता हमारा कल्याण करने वाले हों. हमारी बुद्धि और हमारा धन
हमें सुख देने वाले हों. शोभन संयम से युक्त सत्य वचन हमारे दुःख निवारण और सुख देने के
हेतु बनें. सब से आरंभ में उत्पन्न अर्यमा देव हमें सुख दें. (२)
शं नो धाता शमु धर्ता नो अस्तु शं न उरूची भवतु स्वधाभिः.
शं रोदसी बृहती शं नो अद्रिः शं नो देवानां सुहवानि सन्तु.. (३)
सब का निर्माण करने वाले ब्रह्मा तथा वरुण देव हमें सुख देने वाले हों. पृथ्वी अन्नों के
साथ हमारे दुःखों का निवारण कर के सुख देने वाली बने. धाता, पृथ्वी एवं पर्वत हमें सुख
प्रदान करें. देवताओं की स्तुतियां हमारा कल्याण करें. (३)
शं नो अग्निर्ज्योतिरनीको अस्तु शं नो मित्रावरुणावश्विना शम्.