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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 811 of 1063

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Page 811

आ यूथेव क्ष्मति पश्वो अख्यद् देवानां जनिमान्त्युग्रः.
मर्तासश्चिदुर्वशीरकृप्रन् वृधे चिदर्य उपरस्यायोः.. (२३)
हे अग्नि! तुम्हारे द्वारा भस्म किया जाता हुआ यह यजमान देवताओं के प्रादुर्भाव को
देखे. मरणधर्मा मनुष्य तुम्हारी कृपा से उर्वशी आदि अप्सराओं को भोगने वाले होते हैं.
तुम्हारी कृपा से देवत्व को प्राप्त मनुष्य भी गर्भाशय में स्थित जीवन की वृद्धि वाला होता है.
(२३)
अकर्म ते स्वपसो अभूम ऋतमवसन्न्ुषसो विभातीः.
विश्वं तद् भद्रं यदवन्ति देवा बृहद् वदेम विदथे सुवीराः.. (२४)
हे अग्नि! हम तुम्हारे सेवक हैं और तुम हमारा पालन करने वाले हो. इस कारण हम
शोभन कर्म करने वाले बनें. उषा काल हमारे कर्मों को सत्य बनाए. देवताओं द्वारा रक्षित कर्म
हमारे लिए कल्याणकारी हो. हम भी सुंदर पुत्र आदि से युक्त रहते हुए यज्ञ में विस्तृत स्तोत्रों
का उच्चारण करें. (२४)
इन्द्रो मा मरुत्वान् प्राच्या दिशः पातु बाहुच्युता पृथिवी द्यामिवोपरि.
लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (२५)
मरुतों के स्वामी इंद्र पूर्व दिशा से मेरी रक्षा करें. बाहुओं में प्राप्त पृथ्वी जिस प्रकार
ऊपर स्थित स्वर्ग की रक्षा करती है, उसी प्रकार लोकों तथा मार्गों के निर्माताओं की पूजा हम
यज्ञ द्वारा करते हैं. हे देवगण! तुम इस यज्ञ में भाग प्राप्त करने वाले बनो. (२५)
धाता मा निर्ऋत्या दक्षिणाया दिशः पातु बाहुच्युता पृथिवी द्यामिवोपरि.
लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (२६)
दक्षिण के धाता देव पाप की देवी निर्ऋति के भय से मेरी रक्षा करें. दाता के द्वारा दी गई
पृथ्वी जिस प्रकार स्वर्ग के उपभोक्ता की रक्षा करती है, उसी प्रकार मेरी रक्षा करने वाली हो.
पुण्य के फल के रूप में स्वर्ग के मार्ग का प्रवर्तन करने वालों को हम हवि के द्वारा पूजते हैं. हे
देवगण! इस यज्ञ में तुम भाग प्राप्त करने वाले बनो. (२६)
अदितिर्मादित्यैः प्रतीच्या दिशः पातु बाहुच्युता पृथिवी द्यामिवोपरि.
लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (२७)
देव माता अदिति पश्चिम दिशा के भय से मेरी रक्षा करें. दाता के द्वारा दी गई पृथ्वी
जिस प्रकार दाता और दान ग्रहण करने वाले के स्वर्ग संबंधी उपभोग की रक्षा करती है, उसी
प्रकार मेरी रक्षा करने वाली बने. पुण्य के फल के रूप में स्वर्ग के मार्ग का प्रवर्तन करने वालों
को हम हवि के द्वारा पूजते हैं. हे देवगण! इस यज्ञ में तुम भाग प्राप्त करने वाले बनो. (२७)
सोमो मा विश्वैर्देवैरुदीच्या दिशः पातु बाहुच्युता पृथिवी द्यामिवोपरि.