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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 797 of 1063

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Page 797

इत एत उदारुहन् दिवस्पृष्ठान्यारुहन्.
प्र भूर्जयो यथा पथा द्यामाङ्गिरसो ययुः (६१)
दाह संस्कार करने वाले पुरुषों ने मृतक को पृथ्वी से उठा कर अरथी पर रखा और
आकाश के उपभोग योग्य स्थानों पर चढ़ा दिया. पृथ्वी को जीतने वाले आंगिरस जिस मार्ग
से गए हैं, उसी मार्ग से इसे भी आकाश में पहुंचा दिया. (६१)
सूक्त-२ देवता—यम तथा मंत्र में कहे
गए
यमाय सोमः पवते यमाय क्रियते हविः.
यमं ह यज्ञो गच्छत्यग्निदूतो अरंकृतः.. (१)
यज्ञ में यम के लिए सोम को पवित्र किया जाता है. यम के लिए हवि दी जाती है. नाना
प्रकार के द्रव्यों से सुशोभित किया गया यज्ञ अग्नि को दूत बना कर यम के पास जाता है. ये
ज्योतिष्टोम आदि यज्ञ यम को प्राप्त होते हैं. (१)
यमाय मधुमत्तमं जुहोता प्र च तिष्ठत.
इदं नम ऋषिभ्यः पूर्वजेभ्यः पूर्वेभ्यः पथिकृद्भ्यः.. (२)
हे यजमानो! यम के लिए सोम, घृत आदि की आहुति दो. पूर्व पुरुषों तथा मंत्र द्रष्टा
अंगिरा आदि ऋषियों के लिए नमस्कार हैं. (२)
यमाय घृतवत् पयो राज्ञे हविर्जुहोतन.
स नो जीवेष्वा यमेद् दीर्घमायुः प्र जीवसे.. (३)
हे यजमानो! घृत से युक्त क्षीर रूप हवि यम के लिए अर्पण करो. वे हवि पा कर हमें
जीवित मनुष्यों में रखेंगे और सौ वर्ष की आयु प्रदान करेंगे. (३)
मैनमग्ने वि दहो माभि शूशुचो मास्य त्वचं चिक्षिपो मा शरीरम्.
शृतं यदा करसि जातवेदो ऽ थेमेनं प्र हिणुतात् पितृंरुप.. (४)
हे अग्नि! इस प्रेत को भस्म मत करो; इस की त्वचा को अन्यत्र मत फेंको. इस के लिए
शोक भी मत करो. जब तुम इस हवि रूप शरीर को पका लो, तब इसे रक्षा के लिए पितरों
को दो. इस प्रेत की आत्मा पितृलोक में चली जाए. (४)
यदा शृतं कृणवो जातवेदो ऽ थेममेनं परि दत्तात् पितृभ्यः.
यदो गच्छात्यसुनीतिमेतामथ देवानां वशनीर्भवाति.. (५)
हे जातवेद अग्नि! जब तू इस प्रेत को पूरी तरह भस्म कर दे, तब इसे पितरों के लिए
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