अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextमित्रश्चिद्धि ष्मा जुहुराणो देवाञ्छलोको न यातामपि वाजो अस्ति.. (३३)
देवताओं में क्षत्रिय संबंधी शक्ति वाले यम हमारे हव्य का कुछ भाग ग्रहण करें. कहीं
हम से उस कार्य का अतिक्रमण हो गया जो यम को प्रसन्न करने में सक्षम है तो यहां देवों का
आह्वान करने वाले अग्नि विराजमान हैं. वे ही हमारे अपराध को दूर करेंगे. हमारे पास स्तुति
के समान हवि भी है. उस के द्वारा हम अग्नि को संतुष्ट कर के यम के अपराध से छूट सकते
हैं. (३३)
दुर्मन्त्वत्रामृतस्य नाम सलक्ष्मा यद् विषुरूपा भवाति.
यमस्य यो मनवते सुमन्त्वग्ने तमृष्व पाह्यप्रयुच्छन्.. (३४)
यहां पर यम का नाम लेना उपयुक्त नहीं है, क्योंकि उन की बहन ने उन की पत्नी बनने
की इच्छा की थी. फिर भी जो इन यम की स्तुति करे, हे अग्नि! तुम उस निंदा को भुलाते हुए
उस स्तोता की रक्षा करो. (३४)
यस्मिन् देवा विदथे मादयन्ते विवस्वतः सदने धारयन्ते.
सूर्ये ज्योतिरदधुर्मास्य १ क्तून् परि द्योतनिं चरतो अजस्रा.. (३५)
जिस अग्नि के यज्ञ पूर्ण कराने वाले रूप से प्रतिष्ठित होने पर देवता प्रसन्न होते हैं तथा
जिस के कारण मनुष्य सूर्यलोक में निवास करते हैं, जिस अग्नि ने ही देवताओं के प्रकाशमान
तेज को तीनों लोकों में प्रतिष्ठित किया है तथा अंधकार का नाश करने वाली किरणों को
जिस से लेकर चंद्रमा में स्थापित किया है, सूर्य और चंद्रमा ऐसे तेजस्वी अग्नि की निरंतर
पूजा करते हैं. (३५)
यस्मिन् देवा मन्मनि संचरन्त्यपीच्ये ३ न वयमस्य विद्म.
मित्रा नो अत्रादितिरनागान्त सविता देवो वरुणाय वोचत्.. (३६)
वरुण के जिस स्थान में देवता घूमते हैं, उस स्थान से हम परिचित नहीं हैं. देवगण उस
स्थान से हमारे निर्दोष होने की बात कहें. सविता अदिति, आकाश तथा मित्र देवता भी अग्नि
की कृपा से हम को निर्दोष कहें. (३६)
सखाय आ शिषामहे ब्रह्मेन्द्राय वज्रिणे. स्तुष ऊ षु नृतमाय धृष्णवे..
(३७)
हम सखा रूप इंद्र के लिए दृढ़ कार्य करने की इच्छा रखते हैं. उन शत्रुओं का मर्दन
करने वाले महान नेता और वज्रधारी इंद्र की हम स्तुति करते हैं. (३७)
शवसा ह्यसि श्रुतो वृत्रहत्येन वृत्रहा. मघैर्मघोनो अति शूर दाशसि.. (३८)
हे वृत्र राक्षस का विनाश करने वाले इंद्र! तुम जिस प्रकार वृत्र राक्षस का हनन करने
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