अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextवाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह द्यावा पृथ्वी के पाश से छूट न सके. हम
उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२६)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजोऽस्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स इन्द्राग्न्योः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (२७)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए पदार्थ तथा जीते हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म,
पशु, संतान और सभी वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम वाली स्त्री
के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह इंद्र और अग्नि के बंधन से मुक्त न होने पाए. हम
उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२७)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स मित्रावरुणयोः पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (२८)
शत्रुओं को विदीर्ण कर के लाए हुए पदार्थ और जीते हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान और सब वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम
वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह मित्र और वरुण के बंधन से छूटने न पाए.
हम उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२८)
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स राज्ञो वरुणस्य पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि. (२९)
शत्रुओं को घायल कर के लाए हुए पदार्थ तथा जीते हुए पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान और सब वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले और अमुक नाम
वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से मुक्त करते हैं. वह राजा वरुण के पाश से मुक्त न होने पाए.
हम उस के तेज, बल, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (२९)
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