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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 772 of 1063

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Page 772

तस्मादमुं निर्भजामोऽमुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स आथर्वणानां पाशान्मामोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (१७)
शत्रुओं को घायल कर के लाए हुए और जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान और सभी वीर पुरुष हमारे हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम
वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह अथर्वणों के बंधन से न छूटे. हम उस के
तेज, ब्रह्म, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (१७)
जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स वनस्पतीनां पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (१८)
शत्रुओं को विदीर्ण कर के लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान और सभी वीर पुरुष हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले तथा अमुक नाम
वाली स्त्री के पुत्र को हम इस लोक से दूर करते हैं. वह वनस्पतियों के बंधन से मुक्त न हो.
हम उस के तेज, बल, प्राण तथा आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (१८)
जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स वनस्पत्यानां पाशान्मा मोचि.
तस्येदं वर्चस्तेजः प्राणमायुर्नि वेष्टयामीदमेनमधराञ्चं पादयामि.. (१९)
शत्रुओं का वध कर के लाए गए और जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. हम सत्य, तेज,
ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान तथा सभी वीर पुरुषों के अधिकारी हैं. हम अमुक गोत्र वाले तथा
अमुक नाम वाली स्त्री के पुत्र को इस लोक से दूर करते हैं. वह वनस्पतियों के पाश से मुक्त न
हो. हम उस के तेज, बल, स्वर्ग, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराते हैं. (१९)
जितमस्माकमुद्धिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.
स ऋतूनां पाशान्मा मोचि.
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