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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 721 of 1063

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Page 721

अभ्रातृघ्नीं वरुणापशुघ्नीं बृहस्पते.
इन्द्रापतिघ्नीं पुत्रिणीमास्मभ्यं सवितर्वह.. (६२)
हे बृहस्पति, हे इंद्र, हे सविता देव! इस वधू को अपने भ्राता, पति, पशु आदि का विनाश
करने वाली मत बनाओ. इसे पुत्र, धन आदि में संपन्न रूप में हमें प्राप्त कराओ. (६२)
मा हिंसिष्टं कुमार्य १ स्थूणे देवकृते पथि.
शालाया देव्या द्वारं स्योनं कृण्मो वधूपथम्.. (६३)
हे देव! इस वधू को वहन करने वाले रथ को हानि मत पहुंचाओ. हम इस वधू के मार्ग
को शाला के द्वार पर कल्याणमय बनाते हैं. (६३)
ब्रह्मापरं युज्यतां ब्रह्म पूर्वं ब्रह्मान्ततो मध्यतो ब्रह्म सर्वतः.
अनाब्याधां देवपुरां प्रपद्य शिवा स्योना पतिलोके वि राज.. (६४)
हे वधू! तेरे आगेपीछे, भीतर बाहर एवं मध्य में अर्थात् सभी ओर ब्राह्मण रहें. तू देवों के
निवास वाली एवं रोगरहित शाला को प्राप्त कर तथा पति गृह में मंगलमयी होती हुई प्रसन्नता
प्राप्त कर. (६४)
सूक्त-२ देवता—आत्मा, यक्ष्मानाशिनी
तुभ्यमग्रे पर्यवहन्सूर्यां वहतुना सह.
स नः पतिभ्यो जायां दा अग्ने प्रजया सह.. (१)
हे अग्नि देव! हम दहेज के साथ सूर्या को तुम्हारे निमित्त लाए थे. तुम हमें संतान वाली
पत्नी दो. (१)
पुनः पत्नीमग्निरदादायुषा सह वर्चसा.
दीर्घायुरस्या यः पतिर्जीवाति शरदः शतम्.. (२)
अग्नि देव ने हमें आयु और तेज के साथसाथ पत्नी प्रदान की है. इस का पति दीर्घजीवी
हो और सौ वर्ष की आयु प्राप्त करे. (२)
सोमस्य जाया प्रथमं गन्धर्वस्ते ऽ परः पतिः.
तृतीयो अग्निष्टे पतिस्तुरीयस्ते मनुष्यजाः.. (३)
हे वधू! तू पहले सोम की पत्नी हुई. इस के बाद तू गंधर्वों की पत्नी बनी. इस के बाद
तेरे तीसरे पति अग्नि देव बने. मैं मनुष्य तेरा चौथा पति हूं. (३)
सोमो ददद् गन्धर्वाय गन्धर्वो दददग्नये.
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