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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 709 of 1063

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Page 709

अन्नाद्येन यशसा तेजसा ब्राह्मणवर्चसेन.. (४)
तुम मुझे खानपान, यश, तेज और ब्रह्मवर्चस से युक्त करो. (४)
अम्भो अमो महः सह इति त्वोपास्महे वयम्.
नमस्ते अस्तु पश्यत पश्य मा पश्यत.
अन्नाद्येन यशसा तेजसा ब्राह्मणवर्चसेन.. (५)
तुम जल, पौरुष, महत्ता और बल स्वरूप हो. हम तुम्हारी उपासना करते हैं. हे दर्शनीय!
आप को नमस्कार है. हे शोभन! आप मुझे देखें. आप हमें अन्न, यश, तेज एवं ब्रह्मवर्चस से
युक्त करें. (५)
अम्भो अरुणं रजतं रजः सह इति त्वोपास्महे वयम्.
नमस्ते अस्तु पश्यत पश्य मा पश्यत.
अन्नाद्येन यशसा तेजसा ब्राह्मणवर्चसेन.. (६)
हे जल! आप अरुण एवं श्वेत वर्ण के हैं. हम आप को क्रियात्मक तथा शक्तिरूप समझ
कर आपकी उपासना करते हैं. आप हमें अन्न, यश, तेज तथा ब्रह्मवर्चस प्रदान करें. (६)
सूक्त-९ देवता—अध्यात्म रोहित
उरुः पृथुः सुभूर्भुव इति त्वोपास्महे वयम्.
नमस्ते अस्तु पश्यत पश्य मा पश्यत.
अन्नाद्येन यशसा तेजसा ब्राह्मणवर्चसेन.. (१)
तुम हमें अन्न, यश, तेज और ब्रह्मवर्चस प्रदान करो. तुम्हारी हम उपासना करते है. (१)
प्रथो वरो व्यचो लोक इति त्वोपास्महे वयम्.
नमस्ते अस्तु पश्यत पश्य मा पश्यत.
अन्नाद्येन यशसा तेजसा ब्राह्मणवर्चसेन.. (२)
आप महान, विस्तृत, उत्तम होने वाले एवं सामर्थ्य रूप हैं. हे शोभन! आप को नमस्ते,
हे दर्शनीय! आप मुझे देखें, आप हमें अन्न, यश तेज तथा ब्रह्मवर्चस प्रदान करें. हम आप की
उपासना करते हैं. (२)
भवद्वसुरिद्वद्धसुः संयद्वसुरायद्वसुरिति त्वोपास्महे वयम्.. (३)
हम तुम्हें भागमुक्त, संबंधों को एकत्र करने वाले, संबंधों को प्राप्त करने वाले मान कर
तुम्हारी उपासना करते हैं. (३)
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