अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextसब से ऊपर चढ़ा है. वही निश्चित रूप से द्युलोक पर चढ़ता है. (२६)
सूक्त-४ देवता—अध्यात्म
स एति सविता स्वर्दिवस्पृष्ठे ऽ वचाकशतू.. (१)
वे सूर्य आकाश की पीठ पर चमकते हुए आते हैं. (१)
रश्मिभिर्नभ आभृतं महेन्द्र एत्यावृतः.. (२)
सूर्य ने अपनी रश्मियों से आकाश को ढक दिया है. सूर्य रश्मियों से युक्त हैं. (२)
स धाता स विधर्ता स वायुर्नभ उच्छ्रितम्.
रश्मिभिर्नभ आभृतं महेन्द्र एत्यावृतः.. (३)
वह धाता है, विधाता है तथा वही वायु है, जिस ने आकाश को ऊंचा बनाया है. (३)
सो ऽ र्यमा स वरुणः स रुद्रः स महादेवः.
रश्मिभिर्नभ आभृतं महेन्द्र एत्यावृतः.. (४)
वही अर्यमा, वही वरुण, वही रुद्र और वही महादेव है. (४)
सो अग्निः स उ सूर्यः स उ एव महायमः.
रश्मिभिर्नभ आभृतं महेन्द्र एत्यावृतः.. (५)
वही अग्नि, वे ही सूर्य तथा वे ही महान यम हैं. (५)
तं वत्सा उप तिष्ठन्त्येकशीर्षाणो युता दश.
रश्मिभिर्नभ आभृतं महेन्द्र एत्यावृतः.. (६)
एक शीश वाले दस वत्स उन्हीं की आराधना करते हैं. (६)
पश्चात् प्राञ्च आ तन्वन्ति यदुदेति वि भासति.
रश्मिभिर्नभ आभृतं महेन्द्र एत्यावृतः.. (७)
वे उदय होते ही चमकने लगते हैं तथा उन के पीछे उन की पूजनीय रश्मियां उन के चारों
ओर छा जाती हैं. (७)
तस्यैष मारुतो गणः स एति शिक्याकृतः.. (८)
छींके के आकार वाला उन का ही एक गण मारुत उनके पीछे आ रहा है. (८)
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