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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 679 of 1063

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Page 679

हे अघ्न्या! तू अपहरण करने वाले को समूल नष्ट कर दे. (२)
यथायाद् यमसादनात् पापलोकान् परावतः.. (३)
हे अघ्न्या! तेरा अपहरण करने वाला यम के लोकों और पाप के घरों को प्राप्त हो. (३)
एवा त्वं देव्यघ्न्ये ब्रह्मज्यस्य कृतागसो देवपीयोरराधसः.. (४)
हे अघ्न्या देवी! तू अपराध करने वाले अपहरणकर्ता, देव हिंसक के कंधों और सिर को
काट दे. (४)
वज्रेण शतपर्वणा तीक्ष्णेन क्षुरभृष्टिना.. (५)
हे अघ्न्या! तू सौ पैरों वाले एवं तेज धार वाले वज्र से अपने अपहरणकर्ता का वध कर.
(५)
प्र स्कन्धान् प्र शिरो जहि.. (६)
हे अघ्न्या! तू अपने अपहरणकर्ता को नष्ट कर दे. (६)
लोमान्यस्य सं छिन्धि त्वचमस्य वि वेष्टय.. (७)
हे अघ्न्या! तू अपने अपहरणकर्ता के लोमों को नष्ट कर उस का चमड़ा उधेड़ दे. (७)
मांसान्यस्य शातय स्नावान्यस्य सं वृह.. (८)
हे अघ्न्या! तू अपने अपहरणकर्ता के मांस को काट कर उस की नसों को सुखा दे. (८)
अस्थीन्यस्य पीडय मज्जानमस्य निर्जहि.. (९)
हे अघ्न्या! तू इस अपहरणकर्ता की हड्डियों में दाह और मज्जा में क्षय भर दे. (९)
सर्वास्याङ्गा पर्वाणि वि श्रथय.. (१०)
हे अघ्न्या! इस अपहरणकर्ता के अवयवों और जोड़ों को ढीला कर दे. (१०)
अग्निरेनं क्रव्यात् पृथिव्या नुदतामुदोषतु वायुरन्तरिक्षान्महतो वरिम्र्णः..
(११)
इस अपहरण करने वाले को वायु अंतरिक्ष और पृथ्वी से खदेड़ दे तथा क्रव्याद अग्नि
इसे भस्म कर दे. (११)
सूर्य एनं दिवः प्र णुदतां न्योषतु.. (१२)
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