अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextअशिता लोकाञ्छिनत्ति ब्रह्मगवी ब्रह्मज्यमस्माच्चामुष्माच्च.. (११)
यदि ब्राह्मण को हानि पहुंचाई जाए तो ब्राह्मण की गाय इहलोक और परलोक दोनों को
बिगाड़ देती है. (११)
सूक्त-९ देवता—ब्रह्मगवी
तस्या आहननं कृत्या मेनिराशसनं वलग ऊबध्यम्. (१)
ब्राह्मण की गाय को मारना मरणासन्न बन जाता है. इस को हनन करना कृत्या राक्षसी
है. इस का गोबर युक्त आधा पका हुआ चारा शपथ के समान है. (१)
अस्वगता परिहृणुता.. (२)
ब्राह्मण की अपहरण की गई गाय अपने वश में नहीं रहती है. (२)
अग्निः क्रव्याद् भूत्वा ब्रह्मगवी ब्रह्मज्यं प्रविश्यात्ति. (३)
मारी हुई ब्राह्मण की गाय मांसाहारी पशु बन कर मारने वाले को खाती है. (३)
सर्वास्याङ्ग पर्वा मूलानि वृश्चति. (४)
यदि ब्राह्मण की गाय को कोई मारता है तो यह मारने वाले के शरीर के सभी जोड़ों को
छिन्नभिन्न कर देती है. (४)
छिनत्त्यस्य पितृबन्धु परा भावयति मातृबन्धु. (५)
यह ब्राह्मण की गाय चुराने वाले के पिता के बांधवों का छेदन करती है और माता के
बांधवों को अपमानित करती है. (५)
विवाहां ज्ञातीन्त्सर्वानपि क्षापयति ब्रह्मगवी ब्रह्मज्यस्य
क्षत्रियेणापुनर्दीयमाना. (६)
क्षत्रिय द्वारा ब्राह्मण की गाय न लौटाई जाने पर उस के सभी बंधुओं को नष्ट कर देती
है. (६)
अवास्तुमेनमस्वगमप्रजसं करोत्यपरावरणो भवति क्षीयते. (७)
ब्राह्मण की गाय को अगर क्षत्रिय न लौटाए तो वह क्षत्रिय को गृहहीन तथा संतानहीन
कर देती है. ब्राह्मण की गाय चुराने वाला क्षत्रिय अपरा रोग से ग्रसित हो कर नष्ट हो जाता है.
(७)
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