अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextकूट्यास्य सं शीर्यन्ते श्लोणया काटमर्दति.
बण्डया दह्यन्ते गृहाः काणया दीयते स्वम्.. (३)
वशा गौ के कूटा अर्थात् बिना सींगों वाले अंग के कारण दान न करने वाले के पदार्थ
समाप्त हो जाते हैं. दान न करने वाला लकड़ी से गाय के सींगों के स्थान को पीड़ित करता
है. बंडी अर्थात् बिना सींगों वाली गाय देने से उस के घर का नाश हो जाता है तथा कानी गाय
देने से धन चला जाता है. (३)
विलोहितो अधिष्ठानाच्छक्नो विन्दति गोपतिम्.
तथा वशायाः संविद्धं दुरदभ्ना ह्युच्यसे.. (४)
बिना ब्यायी हुई गौ दुर्दमना कहती है. गौ के स्वामी को वशा के अधिष्ठान अर्थात् रहने
के स्थान से विलोहित शक्ति और संविद्य अर्थात् रक्त ज्वर प्राप्त होता है. (४)
पदोरस्या अधिष्ठानाद् विक्लिन्दुर्नार्म विन्दति.
अनामनात् सं शीर्यन्ते या मुखेनोपजिघ्रति.. (५)
गौ के स्वामी को वशा अर्थात् बिना ब्यायी गाय के पांवों के स्थान से विक्किंदु नाम की
विपत्ति मिलती है. उस के सूंघने से बिना जाने ही उस के पदार्थ नष्ट हो जाते हैं. (५)
यो अस्याः कर्णावास्कुनोत्या स देवेषु वृश्चते.
लक्ष्म कुर्व इति मन्यते कनीयः कृणुते स्वम्.. (६)
वशा गौ के कानों को दुःख देने वाला देवताओं पर प्रहार करता है. जो अपनेआप को
इस गाय के कंधों पर चिह्न न करने वाला मानता है, वह अपनेआप को छोटा बना लेता है.
(६)
यदस्याः कस्मै चिद् भोगाय बालान् कश्चित् प्रकृन्तति.
ततः किशोरा म्रियन्ते वत्सांश्च घातुको वृकः.. (७)
किसी भोग के निमित्त इस वशा गाय के बालों को काटने से काटने वाले का युवा पुत्र
मृत्यु को प्राप्त होता है तथा उस के पुत्रों का संहार शृगाल अर्थात् सियार करते हैं. (७)
यदस्या गोपतौ सत्या लोम ध्वाङ्क्षो अजीहिडत्.
ततः कुमारा म्रियन्ते यक्ष्मो विन्दत्यनामनात्.. (८)
गौ के स्वामी की उपस्थिति में यदि गाय के बालों को कौआ नौचता है तो उस के पुत्र मर
जाते हैं तथा वह स्वयं क्षय रोग को प्राप्त होता है. (८)
यदस्याः पल्पूलनं शकृद् दासी समस्यति.
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