Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 64 of 1063

Read in context
Page 64

सूक्त-२७ देवता—ब्रह्मणस्पति
अमूः पारे पृदाक्वस्त्रिषप्ता निर्जरायवः.
तासां जरायुभिर्वयमक्ष्या ३ वपि व्ययामस्यघायोः परिपन्थिनः.. (१)
सांपों की ये इक्कीस जातियां देवों के समान बुढ़ापे से रहित हैं एवं नागलोक में निवास
करती हैं. इन सांपों की केंचुली जरायु के समान उन से लिपटी रहती है. सांपों की उस केंचुली
के द्वारा हम दूसरों का अहित सोचने वाले शत्रुओं की आंखों को ढकते हैं. (१)
विषूच्येतु कृन्तती पिनाकमिव बिभ्रती.
विष्वक् पुनर्भूवा मनो ऽ समृद्धा अघायवः.. (२)
शिव के धनुष पिनाक के समान शत्रुओं के मारने में सक्षम आयुध धारण करती हुई,
खड्ग आदि आयुधों से शत्रुओं को फाड़ती हुई हमारी सेना मारकाट मचाती हुई आगे बढ़े.
यदि शत्रु सेना उस का सामना करने के लिए एकत्र हो, तो शत्रु सैनिकों का मन कुछ सोचने
और निश्चय करने में समर्थ न हो. ऐसी स्थिति में हमारे शत्रु राष्ट्र, कोश आदि से रहित हो
जाएं. (२)
न बहवः समशकन् नार्भका अभि दाधृषुः.
वेणोरद्गा इवाभितो ऽ समृद्धा अघायवः.. (३)
हाथी, घोड़े और रथों से युक्त बहुत से शत्रु सैनिक हमें जीतने में असमर्थ हो कर हार
जाएं. अल्प संख्या वाले शत्रु हमारे सामने आने का साहस न कर सकें. बांस की ऊपरी
शाखाएं जिस प्रकार दुर्बल होती हैं, हम से पराजित हो कर धनहीन बने शत्रु उसी प्रकार
समृद्धि रहित हो जाएं. (३)
प्रेतं पादौ प्र स्फुरतं वहतं पृणतो गृहान्.
इन्द्राण्येतु प्रथमाजीतामुषिता पुरः.. (४)
हे चलने के इच्छुक व्यक्ति के चरणो! तुम आगे बढ़ो एवं शीघ्र चलने के लिए गति करो.
तुम हमें इच्छित फल देने वाले पुरुष के निवास स्थान तक पहुंचाओ. किसी से पराजित न
होने वाले इंद्र की पत्नी हमारी सेना की देवता हैं. वह हमारी सेना की रक्षा के लिए आगेआगे
चलें. (४)
सूक्त-२८ देवता—अग्नि
उप प्रागाद् देवो अग्नी रक्षोहामीवचातनः.
दहन्नप द्वयाविनो यातुधानान् किमीदिनः.. (१)
ebook converter DEMO Watermarks*