Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 60 of 1063

Read in context
Page 60

वि मन्युमिन्द्र वृत्रहन्नमित्रस्याभिदासतः.. (३)
हे वृत्र राक्षस को मारने वाले इंद्र! तुम राक्षसों का विनाश करो एवं संग्रामों में विजय
प्राप्त करो. तुम वृत्र के समान शक्तिशाली हमारे शत्रु के कपोलों को विदीर्ण करो. (३)
अपेन्द्र द्विषतो मनो ऽ प जिज्यासतो वधम्.
वि महच्छर्म यच्छ वरीयो यावया वधम्.. (४)
हे परम ऐश्वर्य वाले इंद्र देव! हम से द्वेष करने वाले शत्रु के हिंसक मन को नष्ट कीजिए.
जो शत्रु हमें समाप्त करने का इच्छुक है, उस के आयुध का विनाश करो. हमें महान सुख
प्रदान करो एवं मंत्र प्रयोग के कारण असफल न होने वाले शस्त्रों को हम से दूर रखो. (४)
सूक्त-२२ देवता—सूर्य और हृदय रोग
अनु सूर्यमुदयतां हृद्द्योतो हरिमा च ते.
गो रोहितस्य वर्णेन तेन त्वा परि दध्मसि.. (१)
हे रोग ग्रसित पुरुष! तेरे हृदय को संताप पहुंचाने वाला हृदय रोग एवं कामला आदि
रोग से उत्पन्न तेरे शरीर का पीलापन सूर्य की ओर चला जाए. हे रोगी! गाय के लाल वर्ण से
पहचाने जाने वाले के रूप में मैं तुझे स्वस्थ कराता हूं. (१)
परि त्वा रोहितैर्वर्णैर्दीर्घायुत्वाय दध्मसि.
यथायमरपा असदथो अहरितो भुवत्.. (२)
हे व्याधिग्रस्त पुरुष! तेरी दीर्घायु के लिए हम तुझे गाय के समान लाल रंग से ढकते हैं.
यह पुरुष पापरहित हो कर कामला आदि रोगों के कारण होने वाले शरीर के पीले रंग से छूट
जाए. (२)
या रोहिणीर्देवत्या ३ गावो या उत रोहिणीः.
रूपंरूपं वयोवयस्ताभिष्ट्वा परि दध्मसि.. (३)
देवों की जो लाल रंग की कामधेनु आदि गाएं एवं मनुष्यों की जो लाल रंग की गाएं हैं,
इन दोनों प्रकार के लाल रंग के रूप और यौवन को ले कर, हे रोगी पुरुष! हम तुझे ढकते हैं.
(३)
शुकेषु ते हरिमाणं रोपणाकासु दध्मसि.
अथो हारिद्रवेषु ते हरिमाणं नि दध्मसि.. (४)
हे रोगी पुरुष! हम तेरे शरीर में रहने वाले रोग से उत्पन्न हरे रंग को स्रोतों में तथा
रोपणक नामक पक्षियों में स्थापित करते हैं. हम तेरे हल्दी के समान पीले रंग को गोपीतनक
ebook converter DEMO Watermarks*