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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 586 of 1063

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Page 586

हे रुद्र! हमारे सम्मुख आते हुए तुम्हें नमस्कार है और हमारी ओर पीठ कर के जाते हुए
तुम्हें नमस्कार है. खड़े हुए एवं अपने स्थान पर बैठे हुए तुम्हें नमस्कार है. (१५)
नमः सायं नमः प्रातर्नमो रात्र्या नमो दिवा.
भवाय च शर्वाय चोभाभ्यामकरं नमः.. (१६)
हे रुद्र! तुम्हें सायंकाल, प्रातःकाल, रात्रि में एवं दिन में नमस्कार है. हे भव और शर्व! मैं
तुम दोनों को नमस्कार करता हूं. (१६)
सहस्राक्षमतिपश्यं पुरस्ताद् रुद्रमस्यन्तं बहुधा विपश्चितम्.
मोपाराम जिह्वयेयमानम्.. (१७)
हजार नेत्रों वाले, क्रांतदर्शी, सामने की ओर बाण चलाने वाले, मेधावी एवं भक्षण के
लिए सारे संसार को अपनी जीभ के अग्र भाग से व्याप्त करने वाले रुद्र के सामने हम न
जाएं. (१७)
श्यावाश्वं कृष्णमसितं मृणन्तं भीमं रथं केशिनः पादयन्तम्.
पूर्वे प्रतीमो नमो अस्त्वस्मै.. (१८)
काले रंग वाले, काले वस्त्रों वाले, हिंसक एवं भयंकर रुद्र ने केशी नामक असुर के रथ
को तोड़ कर धरती पर डाल दिया था. अन्य स्तोताओं के पूर्ववर्ती हम रुद्र को अपना रक्षक
जानते हैं. ऐसे रुद्र को नमस्कार है. (१८)
मा नो ऽ भि स्रा मत्यं देवहेतिं मा नः क्रुधः पशुपते नमस्ते.
अन्यत्रास्मद् दिव्यां शाखां वि धूनु.. (१९)
हे रुद्र! अपने दैवी बाण को हम मरणधर्माओं पर मत चलाओ. हे पशुपति! हमारे प्रति
क्रोध न करो. तुम्हारे लिए नमस्कार है. शाखा के समान विस्तृत अपने दिव्य बाण को हमारी
अपेक्षा अन्यत्र छोड़ो. (१९)
मा नो हिंसीरधि नो ब्रूहि परि णो वृङ्ग्धि मा क्रुधः. मा त्वया समरामहि..
(२०)
हे रुद्र! हमारी हिंसा मत करो. हमारे प्रति पक्षपात के वचन अधिक मात्रा में बोलो. हमें
तुम अपने आयुध का लक्ष्य मत बनाओ एवं हमारे प्रति क्रोध मत करो. हम कभी भी तुम से
न मिलें. (२०)
मा नो गोषु पुरुषेषु मा गृधो नो अजाविषु.
अन्यत्रोग्र वि वर्तय पियारूणां प्रजां जहि.. (२१)
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