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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 524 of 1063

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Page 524

को अस्मिन् रूपमदधात् को मह्मानं च नाम च.
गांतुं को अस्मिन् कः केतुं कश्चरित्राणि पूरुषे.. (१२)
किस देव ने पुरुष में रूप, महिमा एवं नाम को धारण किया? इसे ज्ञान, चरित्र और गति
किस देव ने प्रदान की? (१२)
को अस्मिन् प्राणमवयत् को अपानं व्यानमु.
समानमस्मिन् को देवो ऽ धि शिश्राय पूरुषे.. (१३)
इस पुरुष में प्राण, अपान एवं व्यान वायु को किस ने धारण किया? इस पुरुष में समान
वायु को किस ने आश्रित किया? (१३)
को अस्मिन् यज्ञमदधादेको देवो ऽ धि पूरुषे.
को अस्मिन्सत्यं को ऽ नृतं कुतो मृत्युः कुतो ऽ मृतम्.. (१४)
किस प्रधान देव ने इस पुरुष में यज्ञ रूप कर्म को स्थापित किया है? इस में सत्य,
असत्य, अमृत और मृत्यु की स्थापना किस ने की? (१४)
को अस्मै वासः पर्यदधात् को अस्यायुरकल्पयत्.
बलं को अस्मै प्रायच्छत् को अस्याकल्पयज्जवम्.. (१५)
इस पुरुष के शरीर पर त्वचा रूपी वस्त्र किस ने रखा और इस की आयु की रचना किस
देव ने की? इस पुरुष के लिए बल किस देव ने प्रदान किया और किसने इसे गति दी? (१५)
केनापो अन्वतनुत केनाहरकरोद् रुचे.
उषसं केनान्वैन्ध्द्ध केन सायंभवं ददे.. (१६)
किस देव ने इस पुरुष के लिए जल की रचना की और किस ने इस के लिए प्रकाश
वाला दिवस बनाया? उषा को किस देव ने उज्ज्वल किया तथा सायंकाल किस ने प्रदान
किया? (१६)
को अस्मिन् रेतो न्यदधात् तन्तुरा तायतामिति.
मेधां को अस्मिन्नध्यौहत् को बाणं को नृतो दधौ.. (१७)
इस पुरुष में वीर्य का आधान किस ने किया, जिस से प्रजा रूपी तंतु का विस्तार हो
सके? इस पुरुष में बुद्धि की स्थापना किस देव ने की तथा किस ने इस में बाण धारण किया?
(१७)
केनेमां भूमिमौर्णोत् केन पर्यभवद् दिवम्.
केनाभि मह्ना पर्वतान् केन कर्माणि पूरुषः.. (१८)
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