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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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हैं. (१२)
भसदासीदादित्यानां श्रोणी आस्तां बृहस्पतेः.
पुच्छं वातस्य देवस्य तेन धूनोत्योषधीः.. (१३)
बैल की कमर आदित्यों की, पीठ बृहस्पति की तथा पूंछ वायु देव की है. उसी से यह
जड़ीबूटियों को कंपित करता है. (१३)
गुदा आसन्त्सिनीवाल्याः सूर्यायास्त्वचमब्रुवन्.
उत्थातुरब्रुवन् पद ऋषभं यदकल्पयन्.. (१४)
बैल की गुदा सिनीवाली अर्थात् अमावस्या का भाग है एवं त्वचा को सूर्य की पत्नी सूर्या
का भाग कहा गया है. इस के पैर उत्थाता का भाग कहे गए हैं. इस प्रकार ऋषियों ने बैल की
कल्पना की. (१४)
क्रोड आसीज्जामिशंसस्य सोमस्य कलशो धृतः.
देवाः संगत्य यत् सर्व ऋषभं व्यकल्पयन्.. (१५)
बैल की गुदा सिनीवाली का भाग थी तथा धारण किया गया कलश सोम का भाग था.
सभी देवों ने एकत्र हो कर इस प्रकार बैल की कल्पना की थी. (१५)
ते कुष्ठिकाः सरमायै कूर्मेभ्यो अदधुः शफान्.
ऊबध्यमस्य कीटेभ्यः श्ववर्तेभ्या अधारयन्.. (१६)
उन बैलों ने सरमा के लिए कुष्ठिकाओं को तथा कर्मों के लिए खुरों को धारण किया.
उन्होंने बैल के ऊपर के भाग को खानों और कीड़ों के लिए धारण किया. (१६)
शृङ्गाभ्यां रक्ष ऋषत्यवर्तिं हन्ति चक्षुषा.
शृणोति भद्रं कर्णाभ्यां गवां यः पतिरघ्न्यः.. (१७)
जो बैल हिंसा न करने योग्य गायों का पति है, वह अपने सींगों से राक्षसों को तथा नेत्रों
से दरिद्रता को दूर भगाता है. वह अपने कानों से कल्याणकारी बातें सुनता है. (१७)
शतयाजं स यजते नैनं दुन्वन्त्यग्नयः.
जिन्वन्ति विश्वे तं देवा यो ब्राह्मण ऋषभमाजुहोति.. (१८)
जो ब्राह्मण बैल का दान करता है, वह शतयाज नामक यज्ञ करने का पुण्य प्राप्त करता
है. उसे अग्नि देव संताप नहीं देते और सभी देव उसे संतुष्ट करते हैं. (१८)
ब्राह्मणेभ्य ऋषभं दत्त्वा वरीयः कृणुते मनः.
पुष्टिं सो अघ्न्यानां स्वे गोष्ठे ऽ व पश्यते.. (१९)
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