अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 47 of 1063
Read in contextप्रकार हे जल! आप अपने अत्यधिक कल्याणकारी रस का हमें अधिकारी बनाएं. (२)
तस्मा अरं गमाम वो यस्य क्षयाय जिन्वथ. आपो जनयथा च न:.. (३)
हे जल! हम जिस अन्न आदि को पा कर तृप्त होते हैं, उसे प्राप्त करने के लिए हम आप
को पर्याप्त रूप में पाएं. हे जल! आप पर्याप्त रूप में आ कर हमें तृप्त करें. (३)
ईशाना वार्याणां क्षयन्तीश्चर्षणीनाम्. अपो याचामि भेषजम्.. (४)
मैं धनों के स्वामी एवं सुख साधन प्रदान कर के गतिशील मनुष्यों को एक स्थान पर
बसाने वाले जल की ओषधि के रूप में याचना करता हूं. (४)
सूक्त-६ देवता—जल
शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये. शं योरभि स्रवन्तु न:.. (१)
दिव्यगुणों वाला जल सभी ओर से हमारा कल्याण करने वाला हो. जल हमारे चारों
ओर कल्याण की वर्षा करे एवं पीने के लिए उपलब्ध हो. (१)
अप्सु मे सोमो अब्रवीदन्तर्विश्वानि भेषजा. अग्निं च विश्वशम्भुवम्.. (२)
मुझे सोम ने बताया है कि सारी ओषधियां एवं अग्नि जल में निवास करती हैं. अग्नि
सारे संसार का कल्याण करने वाली है. (२)
आप: पृणीत भेषजं वरूथं तन्वे ३ मम. ज्योक् च सूर्यं दृशे.. (३)
हे जल! तुम मेरे रोगों का निवारण करने के लिए ओषधियां प्रदान करो. अधिक समय
तक सूर्य के दर्शन करने के लिए तुम मेरे शरीर को पुष्ट करो. (३)
शं न आपो धन्वन्या ३: शमु सन्त्वनूप्या:.
शं न: खनित्रिमा आप: शमु या: कुम्भ आभृता: शिवा न: सन्तु वार्षिकी:..
(४)
जल हमें मरु भूमि में सुखकारी हों. जिन स्थानों में जल की प्राप्ति सुलभ है, वहां के
जल हमारा कल्याण करें. कुआं, बावड़ी आदि खोद कर प्राप्त किए गए जल हमारे लिए
कल्याणकारी हों. घड़े में भर कर लाया गया जल हमें सुख दे. वर्षा से प्राप्त होने वाला जल
हमारे लिए सुखकारी हो. (४)
सूक्त-७ देवता—अग्नि और इंद्र
ebook converter DEMO Watermarks*