अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 449 of 1063
Read in contextपाप का विनाश करें. (७)
अग्नेर्घासो अपां गर्भो या रोहन्ति पुनर्णवाः.
ध्रुवाः सहस्रनाम्नीर्भेषजीः सन्त्वाभृताः.. (८)
जो जड़ीबूटियां जल का गर्भ हैं, अग्नि का भोजन हैं तथा बारबार उगने के कारण
नवीन रहती हैं, इस प्रकार की हजारों नाम वाली जड़ीबूटियां नित्य यहां लाई जाएं. (८)
अवकोल्बा उदकात्मान ओषधयः.
व्युषन्तु दुरितं तीक्ष्णशृङ्ग्यः.. (९)
जो जड़ीबूटियां सिवार घास का गर्भ हैं और जल जिन का जीवन है, बारबार उगने के
कारण जो सदा नवीन रहती हैं, वे रोगों के कारण रूप पापों का नाश करें. उन ओषधियों के
पत्ते अथवा कांटे नोकीली सींक के समान हैं. (९)
उन्मुञ्चन्तीर्विवरुणा उग्रा या विषदूषणीः.
अथो बलासनाशनीः कृत्यादूषणीश्च यास्ता इहा यन्त्वोषधीः.. (१०)
जलोदर रोग का विनाश करने वाली, विष को शांत करने वाली, खांसी आदि रोगों पर
प्रभावशालिनी तथा जो कृत्या नामक पाप देवता को दूर भगाने वाली हैं, वे जड़ीबूटियां यहां
लाई जाएं. (१०)
अपक्रीताः सहीयसीर्वीरुधो या अभिष्टुताः.
त्रायन्तामस्मिन् ग्रामे गामश्वं पुरुषं पशुम्.. (११)
हमारे द्वारा लाई गई, रोगों का विनाश करने में समर्थ एवं मंत्रों द्वारा प्रभावित जो
जड़ीबूटियां हैं, वे इस गांव के मनुष्यों और पशुओं की रक्षा करें. (११)
मधुमन्मूलं मधुमदग्रमासां मधुमन्मध्यं वीरुधां बभूव.
मधुमत् पर्णं मधुमत्
पुष्पमासां मधोः संभक्ता अमृतस्य भक्षो घृतमन्नं दुहतां गोपुरोगवम्..
(१२)
जिन वृक्षों की जड़, ऊपर का भाग एवं मध्य भाग मधुरता पूर्ण हैं, जिन के पत्ते एवं फूल
मधु से भरे हुए हैं, जो मधु से भलीभांति पूर्ण हैं, उन का सेवन करने वाला अमृत का सेवन
करता है. वह स्वस्थ रहता हुआ गायों से घृत तथा अन्न प्राप्त करता है. (१२)
यावतीः कियतीश्चेमाः पृथिव्यामध्योषधीः.
ता मा सहस्रपर्ण्यो मृत्योर्मुञ्चन्त्वंहसः.. (१३)
ebook converter DEMO Watermarks*