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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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यह दिखाई देता हुआ सूर्य हजार वर्ष तक हमें दिखाई देता रहे. क्रांतदर्शी पुरुषों के द्वारा
मनन करने योग्य, सब को अपनेअपने कर्मों में लगाने वाले ये सूर्य हमें प्रतिदिन सत्कर्म करने
की प्रेरणा देते रहें. (१)
ब्रध्नः समीचीरुषसः समैरयन्.
अरेपसः सचेतसः स्वसरे मन्युमत्तमाश्रिते गोः.. (२)
पाप रहित, समान ज्ञान वाले एवं दिन के समय अतिशय दीप्तिशाली सूर्य हमें पूजा
आदि कर्मों में प्रेरित करें. (२)
सूक्त-२४ देवता—दुःस्वप्न विनाश
दौष्वप्न्यं दौर्जीवित्यं रक्षो अभवमराय्यः.
दुर्नाम्नीः सर्वा दुर्वाचस्ता अस्मन्नाशयामसि.. (१)
व्याधि दिखाने वाले बुरे सपने को, राक्षसों को, टोनेटोटके से उत्पन्न भीषण भय को,
पिशाचियों को तथा दरिद्रता को हम इस होने वाले टोटके से ग्रस्त पुरुष से दूर करते हैं. (१)
सूक्त-२५ देवता—सविता
यन्न इन्द्रो अखनद् यदग्निर्विश्वे देवा मरुतो यत् स्वर्काः.
तदस्मभ्यं सविता सत्यधर्मा प्रजापतिरनुमतिर्नि यच्छात्.. (१)
परम ऐश्वर्य वाले इंद्र देव ने हमारे लिए जो फल दिया तथा अग्नि, विश्वे देव, मरुद्गण
और स्वका नामक देवों ने हमारे लिए जो फल दिया. सब के प्रेरक सविता और यथार्थ नाम
वाले प्रजापति ने जिस फल की अनुमति दी. वह फल हमें प्राप्त हो. (१)
सूक्त-२६ देवता—विष्णु
ययोरोजसा स्कभिता रजांसि यौ वीर्यैर्वीरतमा शविष्ठा.
यौ पत्येते अप्रतीतौ सहोभिर्विष्णुमग्न् वरुणं पूर्वहूतिः.. (१)
जिन विष्णु और वरुण के बल के द्वारा पृथ्‍वी आदि स्थान दृढ़ किए गए हैं, जो विष्णु
और वरुण अपने वीरतापूर्ण कर्मों के द्वारा अतिशय शक्तिशाली ऐश्वर्य प्राप्त कर चुके हैं, उन
विष्णु और वरुण को सभी देवों से पहले किया गया आह्वान प्राप्त हो. (१)
यस्येदं प्रदिशि यद् विरोचते प्र चानति वि च चष्टे शचीभिः.
पुरा देवस्य धर्मणा सहोभिर्विष्णुमग्न् वरुणं पूर्वहूतिः.. (२)
विष्णु और वरुण की आज्ञा में यह जगत् विशेष रूप से दीप्त है, सांस लेता है और