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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 346 of 1063

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Page 346

हे विश्वकर्मा! तुम ब्राह्मण से पहले उत्पन्न हुए हो. तुम्हारे इस महत्त्व को जानता हुआ मैं
अपनी रक्षा के लिए तुम्हें हवि प्रदान करता हूं. मेरे द्वारा तुम्हें दिया हुआ यह हवि मुझे
वृद्धावस्था तक दीर्घ जीवन प्रदान करे और मैं अपनी संतान के मध्य जीवन व्यतीत करूं.
(१)
ततं तन्तुमन्वेके तरन्ति येषां दत्तं पित्र्यमायनेन.
अबन्ध्वेके ददतः प्रयच्छन्तो दातुं चेच्छिक्षान्तस स्वर्ग एव.. (२)
कुछ ऋणी जन देह त्याग के पश्चात पुत्र, पौत्र आदि द्वारा पितर संबंधी ऋण चुकाने के
कारण ऋण से छूट गए. पुत्र, पौत्र आदि संतान से रहित लोग धनी को धन धान्य का ऋण
चुका कर उस स्वर्ग को प्राप्त करते हैं, जिसे ऋण चुकाने के इच्छुक प्राप्त करते हैं. (२)
अन्वारभेथामनुसंरभेथामेतं लोकं श्रद्दधानाः सचन्ते.
यद् वां पक्वं परिविष्टमग्नौ तस्य गुप्तये दंपती सं श्रयेथाम्.. (३)
हे पतिपत्नी! परलोक में हित करने वाला कर्म आरंभ करो तथा इस के पश्चात संयुक्त
हो जाओ. कर्मफल के रूप में प्राप्त होने वाले स्वर्ग आदि लोकों में श्रद्धा रखते हुए तुम दोनों
सेवा करो. (३)
यज्ञं यन्तं मनसा बृहन्तमन्वारोहामि तपसा सयोनिः.
उपहूता अग्ने जरसः परस्तात् तृतीये नाके सधमादं मदेम.. (४)
अनशन आदि दीक्षा नियमों के द्वारा दिव्य देह पाने का पात्र बना हुआ मैं अपने द्वारा
किए गए महान यज्ञ का विचार कर के उसी में स्थित रहता हूं. हे अग्नि! तुम्हारी अनुमति पा
कर मैं वृद्धावस्था से भी अधिक आयु पा कर दुःख रहित स्वर्गलोक में पुत्र, पौत्र आदि सहित
हर्षित बनूं. (४)
शुद्धाः पूता योषितो यज्ञिया इमा ब्रह्मणों हस्तेषु प्रपृथक् सादयामि.
यत्काम इदमभिषिञ्चामि वो ऽ हमिन्द्रो मरुत्वान्तस ददातु तन्मे.. (५)
शुद्ध, पवित्र और यज्ञ के योग्य उन जलों को मैं ऋत्विज् ब्राह्मणों के हाथ धोने के लिए
अलग रखता हूं. हे जलो! जिस अभिलाषा से मैं तुम्हें छिड़कता हूं, मरुद्गणों के सहित इंद्र
मेरी वह अभिलाषा पूर्ण करें. (५)
सूक्त-१२३ देवता—विश्वे देव
एतं सधस्थाः परि वो ददामि यं शेवधिमावहाज्जातवेदाः.
अन्वागन्ता यजमानः स्वस्ति तं स्म जानीत परमे व्योमन्.. (१)
हे स्वर्ग में यजमान के साथ बैठने वाले देवो! मैं यह हवि भाग तुम्हें देता हूं. यह विधि
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