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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 308 of 1063

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Page 308

अनडुद्भ्यस्त्वं प्रथमं धेनुभ्यस्त्वमरुन्धति.
अधेनवे वयसे शर्म यच्छ चतुष्पदे.. (१)
हे सहदेवी नाम की ओषधि! तुम सब से पहले गाड़ी खींचने में समर्थ मेरे बैलों को सुख
दो. इस के पश्चात तुम मेरी दुधारू गायों को सुखी बनाओ. मेरी गायों के अतिरिक्त तुम पांच
वर्ष की अवस्था वाले नए बैल, घोड़े आदि चौपायों को भी सुख प्रदान करो. (१)
शर्म यच्छत्वोषधिः सह देवीरुरुन्धती.
करत् पयस्वन्तं गोष्ठमयक्ष्माँ उत पूरुषान्.. (२)
मनचाहा फल देने वाली सहदेवी नाम की ओषधि मुझे सुख दे. वह मेरी गोशाला को
अधिक दूध वाला तथा मेरे पुत्र, सेवक आदि को रोग रहित करे. (२)
विश्वरूपां सुभगामच्छावदामि जीवलाम्.
सा नो रुद्रस्यास्तां हेतिं दूरं नयतु गोभ्यः.. (३)
नाना रूपों वाली, सौभाग्य वाली एवं जीवन देने वाली सहदेवी नाम की ओषधि के
सामने हो कर मैं प्रार्थना करता हूं. वह हमारे हिंसकों द्वारा हमारी ओर चलाई गई तलवार को
हम से और हमारी गायों से दूर ले जाए. (३)
सूक्त-६० देवता—अर्यमा
अयमा यात्यर्यमा पुरस्ताद् विषितस्तपः.
अस्या इच्छन्नग्रुवै पतिमुत जायामजानये.. (१)
जिन की किरणें विशेष रूप से उजली हैं, वह सूर्य पूर्व दिशा में उग रहे हैं. वह इस पति
रहित कन्या को पति और स्त्रीहीन पुरुष को पत्नी प्रदान करने की इच्छा से उदय हो रहे हैं.
(१)
अश्रमदियमर्यमन्नन्यासां समनं यती.
अङ्गो न्वर्यमन्नस्या अन्याः समनमायति .. (२)
हे अर्यमा देव! अन्य पतिव्रता नारियों ने पतियों को पाने के उपायों के रूप में शांति पाने
के लिए जिन कर्मों को किया था, उन्हें पति की अभिलाषा करने वाली यह कन्या कर चुकी है
तथा पति को प्राप्त न करने के कारण दुःखी है. अन्य स्त्रियां इस पतिकाम्या की शांति के
उपाय कर रही हैं. (२)
धाता दाधार पृथिवीं धाता द्यामुत सूर्यम्.
धातास्या अग्रुवै पतिं दधातु प्रतिकाम्यम्.. (३)
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