Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 295 of 1063

Read in context
Page 295

उप प्रागात् सहस्राक्षो युक्त्वा शपथ्यो रथम्.
शप्तारमन्विच्छन् मम वृक इवाविमतो गृहम्.. (१)
हजार आंखों वाले इंद्र शाप क्रिया के कर्ता होते हुए अपने रथ में घोड़े जोड़ कर हमारे
समीप आएं. जिस प्रकार भेड़ों के स्वामी के घर में भेड़िया जाता है, उसी प्रकार वह मुझे
शाप देने वाले शत्रु को मारें. (१)
परि णो वृङ्ग्धि शपथ हृदमग्निरिवा दहन्.
शप्तारमत्र नो जहि दिवो वृक्षमिवाशनिः.. (२)
हे शपथ! तू हमारा वध मत कर. तू अग्नि के समान हमारे शत्रुओं के कुल को जला.
आकाश से गिरा हुआ वज्र जिस प्रकार वृक्ष को नष्ट कर देता है, उसी प्रकार तू इस देश में
हमें शाप देने वाले शत्रु का विनाश कर. (२)
यो नः शपादशपतः शपतो यश्च नः शपात्.
शुने पेष्ट्रमिवावक्षां तं प्रत्यस्यामि मृत्यवे.. (३)
जो शत्रु हम शाप न देने वालों को कठोर वचनों के द्वारा शाप दे तथा जो हम शाप देने
वालों को शाप दे, उन दोनों को हम इस प्रकार मृत्यु के आगे फेंकते हैं, जैसे कुत्ते के आगे
रोटी डाली जाती है. (३)
सूक्त-३८ देवता—बृहस्पति
सिंहे व्याघ्र उत या पृदाकौ त्विषिरग्नौ ब्राह्मणे सूर्ये या.
इन्द्रं या देवी सुभगा जजान सा न ऐतु वर्चसा संविदाना.. (१)
सिंह, बाघ और सर्प में जो आक्रमण के रूप में तेज है, अग्नि में दाह के रूप में, ब्राह्मण
में शाप के रूप में और सूर्य में ताप के रूप में जो तेज है, उसी सौभाग्यशाली तेज ने इंद्र को
जन्म दिया है. वह तेजस्वरुप देवी हमारे तेज से एक होती हुई हमारे समीप आए. (१)
या हस्तिनि द्वीपिनि या हिरण्ये त्विषिरप्सु गोषु या पुरुषेषु.
इन्द्रं या देवी सुभगा जजान सा न ऐतु वर्चसा संविदाना.. (२)
जो तेज गजेंद्र में बल की अधिकता के रूप में, चीते में हिंसा के रूप में तथा सोने में
आह्लाद के रूप में है, जलों में, गायों में और मनुष्यों में जो तेज है, उसी सौभाग्यशाली तेज ने
इंद्र को जन्म दिया है. वह तेजस्वरूपा देवी हमारे तेज से एक होती हुई हमारे समीप आए.
(२)
रथे अक्षेष्वृषभस्य वाजे वाते पर्जन्ये वरुणस्य शुष्मे.
इन्द्रं या देवी सुभगा जजान सा न ऐतु वर्चसा संविदाना.. (३)
ebook converter DEMO Watermarks*