Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 273 of 1063

Read in context
Page 273

किया है. हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (६)
यां ते चक्रुः सेनायां यां चक्रुरिष्वायुधे.
दुन्दुभौ कृत्यां यां चक्रुः पुनः प्रति हरामि ताम्.. (७)
हे कृत्या! अभिचार करने वाले ने तुझे सेना में, बाण पर अथवा दुदुंभि पर स्थित किया
है. हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (७)
यां ते कृत्यां कूपे ऽ वदधुः श्मशाने वा निचख्नुः.
सद्मनि कृत्यां यां चक्रुः पुनः प्रति हरामि ताम्.. (८)
हे कृत्या! अभिचार करने वाले ने तुझे कुएं में, श्मशान में अथवा घर में स्थित किया है.
हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (८)
यां ते चक्रुः पुरुषास्थे अग्नौ संकसुके च याम्.
म्रोकं निर्दार्हं क्रव्यादं पुनः प्रति हरामि ताम्.. (९)
हे कृत्या! अभिचार करने वाले मांसभक्षी ने तुझे पुरुष की हड्डी पर अथवा प्रकाशित
अग्नि पर स्थित किया है. हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे
भेजा है. (९)
अपथेना जभारैणां तां पथेतः प्र हिण्मसि.
अधीरो मर्याधीरेभ्यः सं जभाराचित्त्या.. (१०)
जिस अज्ञानी अभिचारकर्ता ने कृत्या को बुरे मार्ग से हम मर्यादा में रहने वालों पर भेजा
है, हम कृत्या को उसी मार्ग से अभिचार करने वालों की ओर लौटाते हैं. (१०)
यश्चकार न शशाक कर्तुं शश्रे पादमङ्गुरिम्.
चकार भद्रमस्मभ्यमभागो भगवद्भ्यः.. (११)
जिस ने हमारे ऊपर कृत्या का अभिचार किया है, वह हमारी उंगली अथवा पैर को नष्ट
नहीं कर सका है. वह अपनी अभिसंधि में सफल न हो और हम भाग्यशालियों का अमंगल न
कर सके. (११)
कृत्याकृतं वलगिनं मूलिनं शपथैय्यम्.
इन्द्रस्तं हन्तु महता वधेनाग्निर्विध्यत्वस्तया.. (१२)
शत्रुता रखने वाले जिस अभिचारकर्ता ने छिप कर हम पर कृत्या भेजने का दुष्कर्म
किया है, इंद्र उसे अपने विशाल शस्त्र से नष्ट कर दें और अग्नि देव उसे अपनी ज्वालाओं से
जला दें. (१२)
ebook converter DEMO Watermarks*