Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 228 of 1063

Read in context
Page 228

अंतरिक्ष अर्थात् धरती और आकाश के अधिष्ठाता देव के लिए यह हवि समर्पित है. (४)
दिवे स्वाहा.. (५)
द्युलोक अर्थात् स्वर्ग के अधिष्ठाता के लिए हमारी यह हवि समर्पित है. (५)
पृथिव्यै स्वाहा.. (६)
पृथ्वी के लिए हमारी यह हवि समर्पित है. (६)
सूर्यो मे चक्षुर्वातः प्राणो ३ न्तरिक्षमात्मा पृथिवी शरीरम्.
अस्तुतो नामाहमयमस्मि स आत्मानं नि दधे द्यावापृथिवीभ्यां गोपीथाय..
(७)
वायु मेरे नेत्र हैं, वायु मेरा प्राण है, अंतरिक्ष के अधिष्ठाता देव मेरी आत्मा हैं और पृथ्वी
मेरा शरीर है. मैं अमर अथवा मृत्युरहित नाम वाला हूं. हे द्यावा पृथ्वी! मैं अपनी आत्मा को
सुरक्षा के निमित्त आपके सामने समर्पित करता हूं. (७)
उदायुरुद् बलमृत् कृतमृत् कृत्यामुन्मनीषामुदिन्द्रियम्.
आयुष्कृदायूष्पत्नी स्वधावन्तौ गोपा मे स्तं गोपायतं मा.
आत्मसदौ मे स्तं मा मा हिंसिष्टम्.. (८)
हे द्यावा पृथ्वी! तुम हमारी आयु, बल, कर्म, कृत्या, बुद्धि तथा इंद्रियों को उत्कृष्ट
बनाओ. हे आयु बढ़ाने वाले, आयु की रक्षा करने वाले एवं स्व भासमान द्यावा पृथ्वी! तुम
मेरी रक्षा करो! आप मेरी आत्मा में स्थित हो और कभी मेरी हिंसा न करें. (८)
सूक्त-१० देवता—वास्तोष्पति
अश्मवर्म मे ऽ सि यो मा प्राच्या दिशो ऽ घायुरभिदासात्. एतत् स
ऋच्छात्.. (१)
हे पत्थर के बने घर! तू मेरा है. जो पापी हत्यारा मुझे पूर्व दिशा की ओर से नष्ट करना
चाहता है, वह नाश को प्राप्त हो. (१)
अश्मवर्म मे ऽ सि यो मा दक्षिणाया दिशो ऽ घायुरभिदासात्. एतत् स
ऋच्छात्.. (२)
हे पत्थर के बने हुए घर! तू मेरा है. जो हत्या करने का इच्छुक पापी दक्षिण दिशा से
मुझे नष्ट करने का इच्छुक है, वह यहां आतेआते स्वयं नष्ट हो जाए. (२)
अश्मवर्म मे ऽ सि यो मा प्रतीच्या दिशो ऽ घायुरभिदासात्. एतत् स
ebook converter DEMO Watermarks*