अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextपुमांसं पुत्रं जनय तं पुमाननु जायताम्.
भवासि पुत्राणां माता जातानां जनयाश्च यान्.. (३)
हे स्त्री! तू पुत्र को जन्म दे. उस पुत्र की पत्नी से पुत्र ही उत्पन्न हो. इस प्रकार अविछिन्न
रूप से उत्पन्न पुत्रों की भी तू माता होगी. उन के जो पुत्र होंगे, उन की भी तू माता होगी. (३)
यानि भद्राणि बीजान्युषभा जनयन्ति च.
तैस्त्वं पुत्रं विन्दस्व सा प्रसूर्धेनुका भव.. (४)
हे नारी! बैल जिस प्रकार अपने अमोघ वीर्य से गायों में बछड़े उत्पन्न करता है, उसी
प्रकार तू अमोघ वीर्य से उत्पन्न पुत्रों को प्राप्त कर. तू प्रसूता हो कर पुत्रों के साथ वृद्धि को
प्राप्त हो. (४)
कृणोमि ते प्राजापत्यमा योनिं गर्भ एतु ते.
विन्दस्व त्वं पुत्रं नारि यस्तुभ्यं शमसच्छमु तस्मै त्वं भव.. (५)
हे स्त्री! ब्रह्मा ने वृषभ संबंधी जो व्यवस्था की है, उस के अनुसार मैं तेरे लिए
संतानोत्पत्ति संबंधी कर्म करता हूं. गर्भ तेरी योनि में जाए. उस के पश्चात तू पुत्र प्राप्त करे,
वह पुत्र तेरे लिए सुख प्रदान करे तथा तू भी उस के लिए सुख का कारण बने. (५)
यासां द्यौष्पिता पृथिवी माता समुद्रो मूलं वीरुधां बभूव.
तास्त्वा पुत्रविद्याय दैवी: प्रावन्त्वोषधय:.. (६)
जिन वृक्षों का पिता आकाश और माता पृथ्वी है, जलराशि उन की वृद्धि का मूल कारण
है. वृक्षों के रूप में वे दिव्य जड़ीबूटियां पुत्र लाभ के लिए तेरी रक्षा करें. (६)
सूक्त-२४ देवता—वनस्पति
पयस्वतीरोषधय: पयस्वन्मामकं वच:.
अथो पयस्वतीनामा भरे ऽ हं सहस्रश:.. (१)
मेरे जौ, गेहूं आदि अन्न सारयुक्त हों तथा मेरा वचन भी सारयुक्त हो. मैं उन सार वाली
फसलों से उत्पन्न धान्य को अनेक प्रकार से प्राप्त करूं. (१)
वेदाहं पयस्वन्तं चकार धान्यं बहु.
सम्भृत्वा नाम यो देवस्तं वयं हवामहे यो यो अयज्वनो गृहे.. (२)
मैं उस सार वाले देव को जानता हूं. उस ने जौ, गेहूं आदि की वृद्धि की है. भौरे के
समान संग्रह करने वाले जो देव हैं, उन का मैं स्तुतियों के द्वारा आह्वान करता हूं. यज्ञ करने
वाले के घर में जो जौ, गेहूं आदि धान्य है, देव उसे एकत्र कर के मुझे प्रदान करें. (२)
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